शकुंतला चौधरी और विनोबा भावे
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शकुंतला चौधरी और विनोबा भावे
समाजसेविका शकुंतला चौधरी विनोबा भावे की करीबी सहयोगी थी। भूदान आंदोलन के अंतिम चरण में उन्होंने असम में डेढ़ साल की पदयात्रा में सक्रिय तौर पर भाग लिया था। इस पदयात्रा के दौरान शकुंतला चौधरी विनोबा भावे के दल का हिस्सा थीं और उनके उनके संदेशों को असम के लोगों के सामने अनुवादित किया था। चौधरी को फिर से विनोबा भावे ने असम में 'पदयात्रा' आयोजित करने का काम सौंपा गया, जो 1973 में गांधीवादी द्वारा दिए गए एक आह्वान के जवाब में आयोजित राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का एक हिस्सा था।
असमिया विश्व नागरी पत्रिका
कहा जाता है कि शकुंतला चौधरी को विनोबा भावे ने ही देवनागरी लिपि में एक मासिक पत्रिका शुरू करने की सलाह दी थी, जिसका नाम पड़ा 'असमिया विश्व नागरी'। शकुंतला चौधरी ने कुछ साल पहले ही इस पत्रिका का संपादित करना शुरू किया था। यह पत्रिका आज भी गांधीवादी आदर्शों, विचारों और आध्यात्मिकता पर प्रकाश डालती है। विनोबा भावे ने 1978 में गाय वध प्रतिबंध सत्याग्रह की शुरुआत की थी, इस आंदोलन में भी शकुंतला चौधरी सबसे आगे थीं।