साल 1986 में कराची में एक विमान उड़ान भरने के लिए पायलट का इंतजार में था, लेकिन अचानक चार आतंकवादियों में पूरे विमान को हाईजैक करते हुए सभी यात्रियों को गन प्वाइंट पर ले लिया। आतंकी बड़ा हमला करने के लिए विमान का अपहरण करने वाले थे और उन्होंने पायलट की मांग की थी। पर रात के अंधेरे में नीरजा ने अपनी सूझबूझ से विमान का दरवाजा खोल दिया और सभी यात्रियों की जान बचाई। हालांकि इस दौरान आतंकियों ने फायरिंग कर दी और नीरजा शहीद हो गईं।
विमान में 360 लोग थे, जिन्हें नीरजा ने अपना जान की बाजी लगाकर बचाया था। भारत की पहली ऐसी महिला थीं, जिन्हें अशोक चक्र दिया गया। उनकी बहादुरी के लिए तमगा ए इंसानियत का खिताब भी दिया गया। उनके जीवन को फिल्मी पर्दे पर उतारा गया।