इतना ही नहीं सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर पेड़ों की कटाई किए जाने की सरकार की योजना के खिलाफ सालुमारदा ने आवाज भी उठाई थी। सालुमारदा सालों से पेड़ पौधों को अपने बच्चों की तरह पाल पोष रही हैं। सभी पेड़ों की देखभाल करने के साथ ही वह उन पेड़-पौधों से मां की तरह स्नेह करती हैं, समय समय पर उनके गले भी लगती हैं।
सालुमारदा थिममक्का की उपलब्धियां
सालुमारदा को साल 2017 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उस समय सालुमारदा की उम्र 107 साल थी। उनको यह सम्मान पेड़ों के प्रति उनके मातृत्व प्रेम के लिए दिया गया था। सालुमारदा थिममक्का को दुनिया का सबसे वृद्ध पर्यावरण कर्ता माना जा सकता है। साल 2020 में सालुमारदा को कर्नाटक सेंट्रल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि भी मिल चुकी है। ऐसे में अगर उन्हें पेड़ों की मां कहा जाए तो यह गलत न होगा।