Aunty Skates Oorbee Roy: आंटी स्केट्स' के नाम से मशहूर ऊर्बी रॉय एक 50 वर्षीय अमेरिकी महिला हैं, जिन्होंने 43 वर्ष की उम्र में स्केटबोर्डिंग शुरू की। वह केवल एक स्केटर नहीं हैं, बल्कि एक दक्षिण एशियाई मां हैं जो सारी में स्केटिंग करती हैं। उनका अपनी टिक टॉक और इंस्टाग्राम अकाउंट है, जिस पर वह अपने स्केट करते वीडियो शेयर करती हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर लाखों फॉलोअर्स जुड़े हैं। ऊर्बी रॉय के इंस्टाग्राम अकाउंट का नाम आंटी स्केट्स है, जहां वह अपनी स्किल्स को दिखाती हैं। अपने सोशल मीडिया हैंडल्स के अकाउंट नाम के जरिए वह न केवल महिलाओं को प्रेरित करती हैं बल्कि सभी को उनकी इस खास स्किल के लिए उत्साहित भी करती हैं।
कौन हैं ऊर्बी राॅय?
ऊर्बी राॅय टोरंटो की रहने वाली हैं। उनका जन्म अमेरिका में दक्षिण एशियाई विरासत वाले परिवार में हुआ था। उनके पति और बच्चे स्केटबोर्डिंग करते थे। परिवार के साथ समय बिताने के लिए उन्होंने भी इस खेल को अपनाया। उन्होंने अपने स्केटबोर्डिंग सफर को टिक-टॉक और इंस्टाग्राम पर साझा करना शुरू किया, जिससे वे वायरल हो गईं और 'आंटी स्केट्स' के नाम से प्रसिद्ध हो गईं।
ऊर्बी ने क्यों शुरू की स्केटबोर्डिंग?
आंटी स्केट्स ने अपने जीवन में काफी उतार-चढ़ाव देखें। खुद राॅय बताती हैं, "मैंने 43 साल की उम्र में स्केटबोर्डिंग शुरू की ताकि मैं अपने बच्चों के साथ ज्यादा समय बिता सकूँ! लेकिन, मुझे कभी नहीं लगा कि स्केटबोर्डिंग मेरी ज़िंदगी को कितना बेहतर बना देगी। रॉय ने स्केटबोर्डिंग की उचित शिक्षा ली और कई दर्दनाक प्रयासों से खुद को निखारा व यादें बनाईं। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया था कि एक बार स्केटिंग के दौरान वह गिर गईं और उन्हें चोट लग गई। लेकिन मैं सोच रही थी, 'यह बहुत बढ़िया है।'
क्यों पड़ा 'आंटी स्केट्स' नाम?
आंटी स्केट्स के नाम से प्रसिद्धि पाने वाली ऊर्बी राॅय भारत से ताल्लुक रखती हैं, जहां आंटी शब्द का उपयोग आमतौर पर होता है। यहां आंटी का मतलब गपशप करने वाली कंजर्वेटिव और जजमेंटल महिलाओं के लिए होता है और ऊर्बी ने अपने गेम से इस सोच को बदलने के विचार से ये नाम चुना।
रूढ़ीवादी सोच को दी चुनौती
आंटी स्केट्स साड़ी में स्केटबोर्डिंग करते वीडियो शेयर करती हैं। साड़ी एक भारतीय परिधान है जो कि एथलीट एक्टिविटी के मामले में थोड़ा असहज माना जाता है। राॅय ने इस सोच को भी बदलने की कोशिश की। ऊर्बी रॉय ने स्केटबोर्डिंग के प्रति अपने जुनून के माध्यम से वयस्कों को इस खेल में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है। वह स्केटबोर्डिंग के प्रति अपने उत्साह और समर्पण के लिए जानी जाती हैं, और उन्होंने साबित किया है कि उम्र केवल एक संख्या है। उनकी कहानी से यह संदेश मिलता है कि नए कौशल सीखने और अपने सपनों का पीछा करने में कभी देर नहीं होती।