एक दौर ऐसा आया जब कमला भसीन पूरी तरह से टूट गईं। कमला भसीन का एक बेटा था, जिसे सब छोटू कहते थे। उनके बेटे को बचपन में ही वैक्सीन के रिएक्शन के कारण स्वास्थ्य समस्याएं हो गईं थीं। उसे सेरेब्रल पाल्सी हो गया। पति बलजीत मलिक ने कमला को तलाक दे दिया था। इस दौरान उनकी 27 साल की बेटी नीतो ही उनका सहारा थी। जो बेटी कम, दोस्त ज्यादा थी। नीतो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में इतिहास की पढ़ाई कर रही थीं लेकिन घर के हालातों के कारण नीतो डिप्रेशन में चली गई थीं। क्लिनिकल डिप्रेशन से परेशान नीतो ने दवाई भी लेना बंद कर दिया था और अंत में साल 2006 में नीतो ने आत्महत्या कर ली। उसके बाद कमला का जीवन सिर्फ महिलाओं के लिए समर्पित हो गया।
कमला भसीन की रचनाएँ
कवयित्री कमला भसीन ने पितृसत्तात्मक समाज के खिलाफ और महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कई रचनाएं लिखीं। पितृसत्ता क्या है, मर्दानगी की खोज, मितवा आदि उनकी रचनाओं में शामिल हैं। कमला भसीन की कविता ‘क्योंकि मैं लड़की हूं’ काफी मशहूर कविता है। वह जागो री, संगत, वन बिलियन राइजिंग जैसे औरतों के संगठनों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी रहीं। बाद में आजाद भारत की नारीवादी कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता कमला भसीन का 25 सितम्बर को निधन हो गया।