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Jhalkari Bai Jayanti: झलकारी बाई की जयंती आज, जानें आजादी की जंग में उनका योगदान

सार

कहते हैं कि एक बार बचपन में झलकारी बाई पर एक तेंदुए ने हमला कर दिया। झलकारी बाई ने बिना डरे कुल्हाड़ी से तेंदुए को मार डाला।
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झलकारी बाई की जयंती - फोटो : facebook
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विस्तार
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Jhalkari Bal Jayanti: अंग्रेजों की प्रताड़ना के खिलाफ विद्रोह और आजादी की लड़ाई के लिए स्वतंत्रता संग्राम का आगाज 1857 की क्रांति से हो गया था। भारत की 1857 की क्रांति इतिहास के पन्नों में सबसे प्रमुख घटनाओं में शामिल है। इस क्रांति में मंगल पांडे और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम प्रमुख हैं। इनकी शौर्य गाथा बच्चों को कहानी के तौर पर सुनाई जाती है। कैसे एक महिला ने अपने राज्य और गोद लिए बच्चे की रक्षा के लिए अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इस महिला का नाम लक्ष्मीबाई था, जो कि झांसी की रानी थीं। लेकिन झांसी की रानी इस आंदोलन में अकेली महिला नहीं थीं। उनके साथ एक महिला सेनापति भी आजादी की जंग में लड़ी। इस महिला सैनिक का नाम झलकारीबाई था। झलकारी बाई न तो रानी थीं और न ही झांसी की सत्ता उनके हाथ में थी। लेकिन अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए झलकारी बाई ने प्राणों को न्योछावर कर दिया। आज स्वतंत्रता संग्राम की इस महिला आंदोलनकारी झलकारी बाई की जयंती है। आइए जानते हैं झलकारी बाई के बारे में।

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झलकारी बाई का बचपन

इतिहासकार बताते हैं कि झलकारी बाई भोजला गांव की रहने वाली थीं। उनका गांव झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के किले के पास था। किले के दक्षिण में उन्नाव गेट था, वहीं पर झलकारी बाई के घराने के लोग आज भी रहते हैं। झलकारी बाई बचपन से ही साहसी थीं। कम उम्र में उनकी मां का देहांत हो गया। पिता ने झलकारी बाई को घुड़सवारी और हथियार चलाने का प्रशिक्षण दिया।

साहसी झलकारी बाई

कहते हैं कि एक बार बचपन में झलकारी बाई पर एक तेंदुए ने हमला कर दिया। झलकारी बाई ने बिना डरे कुल्हाड़ी से तेंदुए को मार डाला। एक किस्सा और है। झलकारी बाई पर कुछ डकैतों ने गांव के व्यापारी के घर पर हमला बोल दिया था। तब भी झलकारी बाई ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया और गांव से खदेड़ दिया था।

झलकारी बाई की शादी

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उनके साहस को देख झांसी की सेना में तैनात एक सैनिक पूरन कोरी से उनका विवाह करा दिया गया। शादी के बाद उनकी मुलाकात रानी लक्ष्मी बाई से एक पूजा के दौरान हुई। झलकारी बाई को देख कर रानी लक्ष्मीबाई हैरान रह गईं, क्योंकि वह बिल्कुल लक्ष्मीबाई जैसी दिखती थीं। जब लक्ष्मीबाई ने झलकारी बाई के साहस के किस्से सुने तो उन्हें झांसी की सेना में शामिल कर लिया। यहां उन्होंने बंदूक चलाना, तलवार और तोप चलाना सीखा।

लक्ष्मीबाई का रूप लेकर दिया अंग्रेजों को चकमा

जब अंग्रेजी सेना ने झांसी के किले पर हमला बोल दिया तो सेनापतियों ने रानी लक्ष्मीबाई के किले से निकल जाने की सलाह दी। युद्ध में झलकारी बाई के पति शहीद हो चुके थे। उन्होंने अंग्रेजों को चकमा देने की योजना बनाई और लक्ष्मीबाई के कपड़े पहनकर सेना का कमान संभाल ली। अंग्रेजों को भनक तक नहीं हुई कि वह झांसी की रानी नहीं, बल्कि झलकारी बाई हैं। झलकारी बाई भी जनरल रोज के कैंप में पहुंच गईं। इस दौरान मौका पाकर झांसी की रानी वहां से दूर निकल गईं। झलकारी बाई को पता था कि जहां वह जा रहीं, वहां सिवाय मौत के उन्हें कुछ नहीं मिलेगा लेकिन अपनी मातृभूमि, राज्य, रानी और राजकुमार की रक्षा के लिए झलकारी बाई ने जान की परवाह तक न की।
 
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