अगस्त 2018 को जब उन्होंने पहली बार साइकिल चलाने की सोची तो बेटी की पुरानी साइकिल ली। लेकिन सौ मीटर भी ना चला पाईं। लेकिन कनोडे ने हिम्मत नहीं हारी। अगले दिन फिर से साइकिल उठाकर चलाई और दो किमी तक चला डाली। जिससे आत्मविश्वास बढ़ा और वो साइकिलिंग क्लब से जुड़ गईं।
हालांकि साइकिल वेलफेयर क्लब में सारे पुरुष होने की वजह से कनोडे को हिचकिचाहट भी हुई। लेकिन सारे लोगों ने हिम्मत बढा़ई और फिर 19 अगस्त को करीब सौ किमी साइकिल चैलेंज स्वीकार किया। इस प्रतियोगिता में सफलता मिलने के बाद कनोडे ने साइकिल चलाना नहीं छोड़ा। देश के हर कोने से लखनऊ, हैदराबाद, पूना, कोटा, महाराष्ट्र से आने वाले चैलेंज को कनोडे स्वीकार कर लेती हैं। साइकिलिंग के ये सारे चैलेंज ऑनलाइन होते हैं। जिसमे एप डाउनलोड कर डाटा भेजना होता है। इसी आधार पर प्रथम, द्वितीय स्थान दिया जाता है। जिसमें उनको कभी प्रथम तो कभी द्वितीय स्थान मिलता है।