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महिला दिवस : भाइयों ने मना किया, पिता ने दिया साथ, बन गईं वेटलिफ्टर, स्वाती ने तीन साल में जीते पांच पदक

Mon, 08 Mar 2021 10:18 AM IST
शिखा पांडेय पुलकित तिवारी, अमर उजाला, कानपुर
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वेटलिफ्टर स्वाति शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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जब वेटलिफ्टिंग करने का मन बनाया तो भाइयों और आसपास के लोगों ने कहा कि यह खेल लड़कियों का नहीं है। मेरा मन इसी खेल पर था तो पिता ने हौसला दिया और ग्रीनपार्क में मुझे अभ्यास के लिए भेजा। उनकी वजह से तीन साल के अंदर पांच पदक जीत चुकी हूं। यह कहना है कानपुर के ग्वालटोली निवासी वेटलिफ्टर स्वाती शर्मा का।
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होमगार्ड शरणानंद की पुत्री स्वाती महज 20 वर्ष की हैं। दो साल पूर्व मां अनंता देवी का निधन होने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी भी उन पर आ गई है। बीते साल पिता को पैरालाइसिस का अटैक पड़ा तो घर की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई। स्वाती ने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद पापा ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया है। स्वाती के तीन भाई प्राइवेट नौकरी करते हैं। ऐसे में पिता को नौकरी पर लाने-ले जाने की जिम्मेदारी भी स्वाती पर है।
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उपलब्धियां
- 2017, 18 और 19 में ग्रीनपार्क में हुई जिला स्तरीय वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीते।
- 2019 में लखनऊ में हुई राज्य स्तरीय वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता।
- 2019 में ग्रीनपार्क में हुई जनपद स्तरीय ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
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