लड़कियों से भेदभाव आम है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि यह सब सहन नहीं करना पड़ा, लेकिन यह होता है, इनकार नहीं कर सकते। इसे खत्म करने के लिए लड़कियों को निर्णायक और प्रभावशाली भूमिका हासिल करनी होगी।
इसलिए खास...
मंजुला रेड्डी ने बैक्टीरिया की कोशिका के आवरण के व्यवहार पर शोध किया। मंजुला फिलहाल हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी में सेवा दे रही हैं। उन्हें इंफोसिस अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।
- संदेश : सबसे जरूरी है कि लड़कियां अपने जीवन का एक कॅरिअर विकल्प जरूर चुनें। ऐसा क्षेत्र चुनें, जिसके लिए आपमें पैशन, फोकस और अनुशासन यह तीनों बातें हों।
लेह से 220 किमी दूर हनले में एक गर्भवती के प्रसव के दौरान नवजात अटकने की सूचना शाम को अस्पताल में आई। मैं अपनी टीम लेकर जीप में रवाना हुईं, पहुंचने में सुबह हो गई। जांच की तो पाया कि बच्चा उल्टा होने की वजह से अटका था, उसकी जान जा चुकी थी।
मृत बच्चे को निकाला गया, महिला बेहोश थी। उसे अस्पताल लेकर आए जहां गहन इलाज के बाद उसकी जान बची। उस दिन एक जान बचाने के लिए साढ़े चार सौ किमी की दौड़भाग ने लद्दाख की महिलाओं के जीवन की दुश्वारियों को करीब से महसूस करवाया। मुझे लगा कि पैसा कमाने के लिए देश में किसी बड़ी जगह जाकर काम करने के बजाय लेह आने का मेरा निर्णय सार्थक हो गया।
शुरुआत ऐसे हुई : हनले खगोल वेधशाला विश्व की सबसे ऊंची जगह पर है। लेकिन आसपास रहने वाली हजारों महिलाओं के स्वास्थ्य पर निगरानी के लिए न साधन थे न जागरुकता। रिगरिन नामग्याल कलोन और पदमा छुस्कित ने बेटी शेरिंग लैंडल को डॉक्टर बनाया, ताकि उनके क्षेत्र में महिलाओं को इलाज मिल सके।
इसलिए खास...
75 साल की महिला चिकित्सक जो 1979 यानी 40 साल से लद्दाख में काम कर रही हैं। यह शेरिंग के प्रयास हैं कि लेह के सोनम नोरबू मेमोरियल राजकीय अस्पताल में 1979 में जहां सालभर में 250 से भी कम प्रसव करवाए जाते थे, उनके रिटायरमेंट के वर्ष 2003 में संख्या तीन हजार तक पहुंच गई। आपको 2006 में पद्मश्री और 2020 में पद्मभूषण सम्मान मिला।
''शिक्षा व स्वास्थ्य यह ऐसे क्षेत्र हैं जहां लड़कियों और महिलाओं को सबसे ज्यादा मदद चाहिए। मेरी आपसे गुजारिश है कि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पहुंचें और क्षेत्रीय स्तर पर जाकर काम करेंं, यहां आपकी ज्यादा
जरूरत है।''
डॉ. शिल्पी दत्त
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे परिवार में जन्मी जहां लड़की और लड़के में फर्क नहीं किया जाता। माता-पिता शिक्षा का महत्व समझते थे, इसलिए लड़की के रूप में या अपने पसंदीदा विज्ञान की पढ़ाई के लिए कोई अड़चन नहीं आई। अपने कॅरिअर में मैंने कभी इन भेदभावों को महत्व नहीं दिया, कॅरिअर पर फोकस रहा। मैं जानती हूं कि सभी को ऐसा माहौल नहीं मिलता। हालांकि शिक्षा ने हालात में सुधार किया है।
इसलिए खास...कैंसर के इलाज के दौरान कीमो थैरेपी से डीएनए क्षतिग्रस्त होने व उनके सुधार और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता की वजह से आने वाली दिक्कतों पर शोध कर रही हैं। केंद्र के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने जानकी अम्मल नेशनल वीमेन बायोसाइंटिस्ट अवाॅर्ड 2019 के जरिये देश की सर्वश्रेष्ठ युवा बायोसाइंटिस्ट चुना।
''कई बार लड़कियों को भेदभाव की वजह से अपने कॅरिअर को छोड़ते देखा है। मुझे लगता है कि ऐसे मौकों पर लड़कियों को कुछ और मजबूती से खड़े रहना चाहिए।''