उन्हें मिठाइयों का ऑर्डर आना भी शुरू हुआ। उस साल जन्माष्टमी में उन्हें 40 थाली मिठाइयों का ऑर्डर मिला था। थाली में चार अलग अलग तरह की मिठाइयां थीं, जिसे खुद नानी ने तैयार किया। मिठाइयों की पैकिंग और डिलीवरी की जिम्मेदारी याशी की थी। उनकी मिठाइयों को ग्राहकों ने पसंद किया। यहां से नानी के फूड बिजनेस की सफल शुरुआत हुई।
नानी नातिन की उपलब्धि
उनके लिए यह बड़ी उपलब्धि थी कि इतने कम वक्त में उन्हें न केवल पूरे देश से मिठाइयों और अन्य स्नैक्स के ऑर्डर मिलने शुरू हुए, बल्कि दिवाली और मकर संक्रांति आदि त्योहारों के मौके पर हांगकांग और अमेरिका से भी ऑर्डर आए। दूसरे राज्यों और विदेशों के लिए वह उन्हीं चीजों के ऑर्डर लेतीं हैं जो जल्दी खराब न होते हों। ताकि दूर पहुंचने के बाद भी वह खाने योग्य रहें। नानीज स्पेशल के ओवरऑल बिजनेस को याशी संभालती हैं, उनकी मां ऑर्डर लेने और डिलीवरी का काम संभालती हैं और नानी की जिम्मेदारी ऑर्डर तैयार करने की होती है। ज्यादा ऑर्डर होने पर वह दो तीन लोगों की मदद लेती हैं लेकिन मुख्य तौर पर पकवान वही बनाती हैं। उन्होंने बिजनेस शुरु होने के बाद महज आठ महीनों में चार लाख रुपये तक की कमाई की।