नक्सल प्रभावित इलाके दंतेवाड़ा के गीदम शहर की रहने वाली नम्रता ने शुरूआती शिक्षा इसी शहर से ली। जिसके बाद हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए वो दुर्ग चली गईं। आईएएस नम्रता ने ईंजीनियरिंग की पढ़ाई भिलाई से पूरी की है। साल 2015 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी। लेकिन उसमे उन्हें असफलता हाथ लगी। हालांकि निराश होने के बजाय नम्रता ने साल 2016 में एक बार फिर परीक्षा देने का निश्चय किया। जिसमे पास होकर वो मध्य प्रदेश कैडर की आईपीएस अधिकारी बनीं। हालांकि उनका सपना हमेशा से प्रशासनिक सेवा में जाने का था और उन्होंने अपने सपनों से समझौता नहीं किया। अगली बार पूरी तैयारी और फोकस के साथ वो सिविल सेवा की परीक्षा में बैठी। जहां पहले ही प्रयास में उन्हें सफलता हाथ लगी और 12वीं रैक के साथ उनका चयन सिविल सेवा के लिए हो गया।
लेकिन उनका सपना हमेशा से आईएएस अधिकारी बनना ही था। इसलिए उन्होंने साल 2018 में एक बार फिर परीक्षा दी और पहले प्रयास में ही वो ऑल इंडिया रैंक में 12 वें स्थान पर रहीं और आईएएस बनने के सपने को पूरा किया। नम्रता जैन के चाचा का कहना है कि 'वो हमेशा से पढ़ने वाली छात्रा थी। स्कूल से लेकर कॉलेज के दिनों तक उसने अपना फोकस नहीं खोया।' उसे पता था कि वो एक दिन जरूर सिविल सर्विस की परीक्षा पास करेगी। वो बताते हैं कि पढ़ाई के लिए उसने गीदम शहर से निकलकर दुर्ग और भिलाई तक गई। अपनी पढ़ाई को पूरी करने के लिए उसने काफी मेहनत की है। जिसका नतीजा हर किसी के सामने है।' पढ़ाई को जारी रखने के लिए नम्रता ने 350-400 किमी का सफर तय किया। घऱ से दूर उसने हाईस्कूल, इंटर के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। छत्तीसगढ़ कैडर की आईएएस नम्रता अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी शेयर करती हैं। जिसमे वो बुलेट चलाते और बंदूक चलाते भी दिखती हैं।