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Arundhati Roy: खाली बोतलें बेचकर कमाई करने से प्रतिष्ठित लेखिका बनने तक, ऐसा रहा अरुंधति राय का सफर

Wed, 17 Apr 2024 09:14 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महज 16 साल की उम्र में अरुंधति ने अपना घर छोड़ दिया और दिल्ली आकर रहने लगीं। अपने साक्षात्मकार में अरुंधति ने बताया था कि उन्होंने खाली बोतलें बेचकर फीस के पैसे जुटाए थे। तब जाकर उनका दिल्ली स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर में हुआ।
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अरुंधति रॉय - फोटो : social media
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विस्तार
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Arundhati Roy: प्रसिद्ध लेखिका और समाज सेविका अरुंधति राय देश-विदेश तक मशहूर हैं। साहित्य क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय है। अपने अथाह ज्ञान और कलम की ताकत से अरुंधति राय समाज सुधार के लिए जानी जाती हैं। अरुंधति राय अंग्रेजी की प्रसिद्ध लेखिका हैं। अरुंधति को अपने लेखन कार्य और सोशल वर्क के लिए कई बड़े अवार्ड मिल चुके हैं। 24 नवंबर को अरुंधति राय का जन्मदिन होता है। एक प्रतिष्ठित लेखिका और समाज सेविका बनने तक का सफर आसान नहीं था। आइए जानते हैं अरुंधति राय के जीवन संघर्षों के बारे में, जिन्होंने उन्हें बनाया देश की सुप्रसिद्ध उपन्यासकार और समाजसेविका।

 

अरुंधति राय का जीवन परिचय

 

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अरुंधति राय का जन्म शिलॉन्ग में 24 नवंबर 1961 को हुआ था। अरुंधति राय की मां का नाम मैरी रॉय और पिता का राजीव राॅय था। उनकी मां मैरी राॅय केरल की सीरियाई ईसाई परिवार से थीं, जबकि पिता कलकत्ता के एक बंगाली हिंदू परिवार से थे।जब अरुंधति दो साल की थीं तो उनके माता-पिता एक दूसरे से अलग हो गए। इसके बाद अरुंधति अपनी मां और भाई के साथ केरल आ गईं और अपना बचपन गुजारा।

 


अरुंधति राय की शिक्षा

 

केरल के अयमनाम में अरुंधति अपने परिवार के साथ रहती थीं। शुरुआती शिक्षा मां के स्कूल से पूरी की, जिसका नाम कॉर्पस क्रिस्टी था। बाद में अरुंधति ने दिल्ली आकर आर्किटेक्ट की पढ़ाई पूरी की।

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16 साल में छोड़ा घर


महज 16 साल की उम्र में अरुंधति ने अपना घर छोड़ दिया और दिल्ली आकर रहने लगीं। अपने साक्षात्मकार में अरुंधति ने बताया था कि उन्होंने खाली बोतलें बेचकर फीस के पैसे जुटाए थे। तब जाकर उनका दिल्ली स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर में हुआ।


लेखिका अरुंधति का करियर


करियर के शुरुआती दिनों में अरुंधति ने अभिनय भी किया। वह मैसी साहब नाम की फिल्म में लीड रोल किया। बाद में अरुंधति ने कई फिल्मों के लिए पटकथाएं लिखीं। उनके लेखन में परिवार, माता पिता का गहरा असर देखने को मिलता है। अरुंधति की किताब में उनके बचपन की घटनाओं का जिक्र मिलता है।

 

अरुंधति राय का किताब संग्रह


अंग्रेजी की उपन्यासकार अरुंधति राय ने 'इन विच एनी गिव्स इट दोज़ वंस (1989), इलेक्ट्रिक मून (1992) और गॉड ऑफ स्माल थिंग्स जैसे उपन्यास लिखे।

 

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