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पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' में किया था इस हीरोइन ने काम, नवाबों के खानदान से था ताल्लुक

Sat, 18 Jul 2020 09:26 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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alam ara - फोटो : social media
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फिल्मों का नाम आते ही तरह-तरह की हीरोइनों से लेकर हीरो तक आंख के सामने आ जाते हैं। ये हीरो-हीरोइन हर किसी की जिंदगी में इतना रचे बसे हैं कि टीवी पर आने वाले विज्ञापन से लेकर मोबाइल पर दिखने वाले वॉलपेपर तक में शामिल रहते हैं। लेकिन एक जमाना ऐसा भी था जब फिल्में देखना रईस लोगों की आदत होती थी। साधारण आदमी तक थियेटर पहुंचना असंभव था। भले ही आज हम मोबाइल पर ही अपनी पसंदीदा सितारों की फिल्में देख लेते हों लेकिन कई दशक पहले ये सब इतना आसान नहीं था। कई साल पहले जब भारत की पहली फिल्म बनी थी राजा हरिश्चंद्र तो उसमें हीरोइन का किरदार करने के लिए कोई महिला नहीं मिली तब एक आदमी ने इस किरदारk को निभाया। तो चलिए जानें हिंदी फिल्मों की पहली नायिका से जिसने फिल्मों में अभिनय के लिए महिलाओं के दरवाजे खोले। इस अदाकारा का नाम है 'जुबैदा।'

 

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जुबैदा जब बारह साल की थी तब उन्होंने हिंदी फिल्मों में कदम रखा था। सबसे पहली फिल्म कोहिनूर में जुबैदा मात्र बारह साल की थीं। जुबैदा ने फिल्मों में काम करना उस वक्त शूरू किया जब औरतों के लिए ये काम अच्छा नहीं माना जाता था। साल 1920 में कोहिनूर फिल्म में जुबैदा ने अपनी बहन सुल्ताना के साथ पर्दे पर कदम रखा था। 
जुबैदा का जन्म गुजरात के सूरत शहर में हुआ था। मुस्लिम परिवार में जन्मी जुबैदा के पिता नवाब थे। नवाब सीदी इब्राहिम मोहम्मद याकुत खान तृतीय थे। इसके साथ ही जुबैदा के दो और बहनें थीं, सुल्ताना और शहजादी। तीनों ही बहनें अभिनेत्री थीं और फिल्मों में काम करती थीं। ये वो दौर था जब एक इज्जतदार परिवार की महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। 

 
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जुबैदा ने पहली बोलती फिल्म आलम आरा में अभिनय किया था। जिसके बाद उनके काम की मांग ज्यादा होने लगी और उनके मेहनताने को भी बहुत ज्यादा बढ़ा दिया गया था। जुबैदा अपने जमाने की चर्चित अभिनेत्रियों में से एक थीं। 1925 में जुबैदा ने एक के बाद एक नौ फिल्मों में अभिनय किया था। जिसमें काला चोर, देवदासी, देश का दुश्मन जैसी फिल्में शामिल हैं। 
जुबैदा ही हिंदी फिल्मों की पहली नायिका थी जिसने पहली बार स्क्रीन पर किस कर तहलका मचाया था। फिल्म एजरा मिर्जा में जरीन नाम की सर्कस गर्ल का किरदार उनके अभिनय के सफर को यादगार बनाता है। 1988 में जुबैदा के मरने से पहले उनकी आखिरी फिल्म निर्दोष अबला थी। जिसमे उन्होंने अभिनय किया था।
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