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पति की शहादत के बाद नहीं खोया धैर्य, सेना में कैप्टन बनने के बाद चुनी सियासत की राह

Sun, 06 Dec 2020 10:32 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कैप्टन शालिनी सिंह - फोटो : अमर उजाला
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मुश्किल वक्त में जो धैर्य से काम करें उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। ऐसी ही कहानी है सेना में कैप्टन के पद पर काम कर चुकीं शालिनी सिंह की। जिन्होंने मात्र 23 साल की उम्र में पति को खो दिया। सेना में नौकरी करते हुए शालिनी सिंह के पति शहादत को प्राप्त हुए। आज शालिनी राजनीति में अपनी किस्मत आजमा रही हैं। 

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साल 2001 में मेजर अविनाश सिंह भदौरिया कश्मीर में चार आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शहीद हुए। 23 साल की उम्र में शालिनी दो साल के बच्चे की मां थी। ऐसे में पति का साथ छोड़ देना उनके लिए किसी दैवीय आपदा से कम नही था। लेकिन अपने आंसुओं को ताकत बना वो सेना में भर्ती हुईं। तीन महीने के भीतर शार्ट सर्विस कमीशन में चयन हो गया। फिर सेना में कमीशन मिल गया। वहीं पति अविनाश सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। 
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छह साल तक लगातार देश के अलग-अलग हिस्सों में सेना में नौकरी की। लेकिन बेटे के भविष्य के लिए नौकरी छोड़नी पड़ी। क्योंकि सिंगल मदर बन उसे पालने के लिए देखभाल जरूरी थी। साल 2017 में सौंदर्य प्रतियोगिता मिस अर्थ में भारत का प्रतिनिधित्व किया। सिंगल पैरेंट कैटेगरी में मिसेज इंडिया क्लासिक क्वीन खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला है शालिनी सिंह। हमेशा नया करने की चाह रखने वाली शालिनी ने सियासत में कदम रखा है। वो इस समय आप पार्टी की प्रवक्ता के पद पर काम कर रही हैं। लगातार संघर्षों के जरिए शालिनी अपने बेटे की परवरिश कर अपने लिए नया मुकाम बना रही हैं। साथ ही खुद को कमजोर और असहाय समझने वाली महिलाओं के लिए बहुत बड़ा उदाहरण भी पेश कर रही हैं।
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