अलीना एक ऐसे मॉडल को बनाने की दिशा में काम कर रही हैं, जो प्रैक्टिकल होने के साथ साथ इंटरेक्टिव भी हो। उनका कहना है कि हम सभी लोगों की प्राथमिकता भोजन है। भोजन ही लोगों को आपस में एक दूसरे के साथ जोड़ता है। इसी वजह से वे अपने मिट्टी कैफे के माध्यम से अधिक से अधिक दिव्यांगों के साथ जुड़ना चाहती हैं।
आलीना से जब यह पूछा गया है कि आपने अपने कैफे का नाम मिट्टी ही क्यों चुना? इस पर उन्होंने कहा - "हम भले ही चाहे किसी भी वर्ग या समुदाय से संबंध रखते हों, पर हमारा उद्गम मिट्टी से ही हुआ है और हमारा अंत भी इसी में होगा। इसी वजह से मैंने इस कैफे का नाम मिट्टी रखा।"
आपको बता दें कि साल 2017 में सबसे पहले मिट्टी कैफे को बी.वी.बी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में देशपांडे फाउंडेशन द्वारा स्थापित किया गया था। अलीना मिट्टी कैफे की ब्रांड एंबेसेडर होने के साथ-साथ एक जानी मानी शख्सियत भी हैं। उनकी इस पहल के चलते कई दिव्यांग लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। वहीं उनका यह काम कई लोगों के लिए एक प्रेरणा भी बना है।