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Ram Mandir: सिवानीमंडी के 30 लोग UP की अस्थायी जेल की दीवार तोड़ पहुंचे थे अयोध्या, ढांचा ढहाने में रहे शामिल

Sat, 06 Jan 2024 08:48 AM IST
नवीन दलाल नगेश शर्मा, हिसार (हरियाणा)

सार

सिवानी मंडी निवासी प्रेम कुमार किंगर, प्रह्लाद गर्ग, आत्म मधु, संजय गोयल समेत 38 कार सेवक 22 अक्तूबर 1990 की रात अयोध्या के लिए रवाना हुए। 24 अक्तूबर को मनकापुर स्टेशन पर 30 कार सेवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर कॉलेज में बनाई अस्थायी जेल में बंद कर दिया।
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प्रह्लाद गर्ग, प्रेम कुमार किंगर, संजय गोयल व आत्म मधु - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सन 1990 में कार सेवा के दौरान अयोध्या में चलीं ताबड़तोड़ गोलियों से बहे खून का दृश्य कार सेवक भूल नहीं पा रहे। 30 अक्तूबर को गोली लगने से लहूलुहान कार सेवक ने सिवानी मंडी के रामभक्त प्रेम कुमार किंकर की गोद में दम तोड़ा तो प्रेम ने दो दिन तक खाना नहीं खाया। प्रेम समेत सिवानी निवासी 30 रामभक्त यूपी के गोंडा में बनी अस्थायी जेल की दीवार तोड़कर अयोध्या पहुंचे थे। 1992 में कार सेवा से पहले तीन दिन जेल में रहने के बाद भी प्रेम अयोध्या पहुंचे और ढांचा ढहाने में शामिल रहे। अब मंदिर निर्माण पर सिवानी के कार सेवक इसे जीवन की बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं।

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सिवानी मंडी निवासी प्रेम कुमार किंगर, प्रह्लाद गर्ग, आत्म मधु, संजय गोयल समेत 38 कार सेवक 22 अक्तूबर 1990 की रात अयोध्या के लिए रवाना हुए। प्रेम ने बताया कि 23 अक्तूबर को सुबह 10 बजे लखनऊ पहुंचे तो धरपकड़ शुरू हो गई। वहां से बचे तो गोंडा जिले की रामजानकी धर्मशाला में शरण ली। 24 अक्तूबर को मनकापुर स्टेशन पर 30 कार सेवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर कॉलेज में बनाई अस्थायी जेल में बंद कर दिया।

काफी लोगों को नैनी जेल भेज दिया गया। 27 अक्तूबर की रात दीवार तोड़कर 28 अक्तूबर को जंगलाें में छिपते रहे। नालों तथा झाड़ियों में छिपकर 29 अक्तूबर की रात अयोध्या के पास सुनई गांव में पहुंचे। यहां करीब 20 हजार रामभक्त थे। 30 अक्तूबर की दोपहर किसी तरह प्रेम किंगर, संजय गोयल और हनुमान ही सरयू के पुल पर पहुंच सके।
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हनुमान गढ़ी की ओर बढ़े तो पुलिस की फायरिंग और आगजनी शुरू हो गई। प्रेम ने बताया कि इसी दौरान गोली लगने से घायल दो रामभक्त उनके पास आकर गिरे। एक को गोद में उठाया तो उसने गोद में ही दम तोड़ दिया। इसी दौरान पुलिस ने लाठियां बरसाईं। तभी दूसरे घायल को पुलिसकर्मी उठा कर ले गए। चारों ओर आग और सड़कों पर खून बिखरा देखकर रूह कांप गई। किसी तरह वहां से भागकर मनकापुर पहुंचे। कई दिन पुलिस से बचकर भागते हुए दो नवंबर को हिसार पहुंचे।

1992 में तीन दिन रहे जेल फिर भी पहुंच गए अयोध्या
प्रेम कुमार किंगर ने बताया कि 1992 में कार सेवा से पहले ही पुलिस ने उन्हें, विक्रम, दिलबाग, सुभाष और गोविंद बंसल को गिरफ्तार कर भिवानी जेल भेज दिया। उन्हें पुलिस ने अयोध्या न जाने की हिदायत दी थी। जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद अयोध्या पहुंचकर कार सेवा में शामिल हुए।

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