लोगों ने गांव के खेतों का रास्ता पकड़ा और आगे बढ़ते गए। पुनीत बताते हैं कि उनको विहिप की तरफ से कार सेवकों के भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी मिली थी। लाठीचार्ज के बाद प्रयागराज में कर्फ्यू लगा दिया गया। सैकड़ों कार सेवकों को इलाहाबाद डिग्री कॉलेज, महिला ग्राम इंटर कॉलेज समेत कई अन्य विद्यालयों में बने अस्थाई जेलों में भेज दिया गया।
दूसरी, तरफ नागपुर से कारसेवकों का जत्था प्रयागराज पहुंचने वाला था। ऐसे में किसी प्रकार उनके रुकने का प्रबंध लोगों के घरों, धर्मशालाओं, संघ के कीडगंज कार्यालय, मठों में कराया गया। कर्फ्यू में इन लोगों तक खाना पहुंचाना बेहद मुश्किल हो रहा था। ऐसे में मीरापुर के पंजाबी कालोनी में महिलाओं ने खाना बनाने की कमान संभाली और अपने घरों के बाहर सड़क पर 20 तंदूर लगा दिया। जिसमें सैकड़ों कारसेवकों के लिए रोटियां बनने लगी।
ऐसे में समस्या थी कि उन तक कैसे खाना पहुंचाया जाए। पिता जी के दो मित्र शहर के अलग-अलग समाचार पत्रों के बड़े पत्रकार थे। ऐसे में उनके सहारे चार पहिया का पास बनवाया और उनको साथ लेकर ड्राइवर की तरह शहर में घूम-घूम कर कारसेवकों को भोजन पहुंचाने में जुट गया।