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राम मंदिर: कारसेवकों के लिए दिखा जुनून, कर्फ्यू के बीच महिलाओं ने पंजाबी कॉलोनी की सड़कों पर लगा दिए 20 तंदूर

Mon, 15 Jan 2024 02:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अपने पुराने संस्मरण याद करते वह बताते हैं कि पिता लंबे समय से संघ से जुड़े थे। ऐसे में परिवार में राम मंदिर आंदोलन को लेकर हमेशा चर्चा होती थी। पुनीत खुद विश्व हिंदू परिषद से जुड़े होने के कारण कार सेवा की तैयारियों में जुटे रहे।
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अयोध्या का भव्य रामलला का मंदिर - फोटो : social media
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विस्तार
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अयोध्या में रामलला की प्राण -प्रतिष्ठा की तैयारियों के बीच इस शुभ घड़ी का हर कोई साक्षी बनने के लिए आतुर है। ऐसे में इस उत्सवमय माहौल में राम मंदिर आंदोलन के संस्मरण लोगों के जेहन में बरबस याद आ जाते हैं। विश्व हिंदू परिषद से दशकों से जुड़े पुनीत वर्मा बताते हैं कि 30 अक्तूबर 1990 का दिन आज भी उनको याद है। उस समय कारसेवा की तैयारियों में ही उनका पूरा समय बीतता था। अशोक सिंघल के नेतृत्व में वह राममंदिर आंदोलन से जुड़े रहे। आंदोलन को लेकर युवाओं में गजब का उत्साह था। घर से लेकर बाहर बाजारों तक इसकी ही चर्चा होती थी।

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अपने पुराने संस्मरण याद करते वह बताते हैं कि पिता लंबे समय से संघ से जुड़े थे। ऐसे में परिवार में राम मंदिर आंदोलन को लेकर हमेशा चर्चा होती थी। पुनीत खुद विश्व हिंदू परिषद से जुड़े होने के कारण कार सेवा की तैयारियों में जुटे रहे। 30 अक्तूबर को शुरू होने वाली कारसेवा में कितने लोगों का हुजूम आने को है, इसको लेकर कोई सटीक अंदाजा किसी को नहीं था। ऐसे में कार सेवा की शुरूआत हुई।

निर्धारित तिथि 30 अक्तूबर को लाखों की भीड़ सिविल लाइंस के सुभाष चौराहा पर एकत्र होने लगी। भीड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सिविल लाइंस से लेकर कटरा तक सड़कों पर लोगों का हुजूम था। भीड़ अयोध्या कि ओर चलने को आतुर थी, लेकिन जैसे ही भीड़ फाफामऊ पुल से आगे बढ़ी। पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। इसमें अशोक सिंघल समेत बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। जिसको जहां और जैसे मौका मिला, वह आगे बढ़ता गया।

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लोगों ने गांव के खेतों का रास्ता पकड़ा और आगे बढ़ते गए। पुनीत बताते हैं कि उनको विहिप की तरफ से कार सेवकों के भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी मिली थी। लाठीचार्ज के बाद प्रयागराज में कर्फ्यू लगा दिया गया। सैकड़ों कार सेवकों को इलाहाबाद डिग्री कॉलेज, महिला ग्राम इंटर कॉलेज समेत कई अन्य विद्यालयों में बने अस्थाई जेलों में भेज दिया गया।

दूसरी, तरफ नागपुर से कारसेवकों का जत्था प्रयागराज पहुंचने वाला था। ऐसे में किसी प्रकार उनके रुकने का प्रबंध लोगों के घरों, धर्मशालाओं, संघ के कीडगंज कार्यालय, मठों में कराया गया। कर्फ्यू में इन लोगों तक खाना पहुंचाना बेहद मुश्किल हो रहा था। ऐसे में मीरापुर के पंजाबी कालोनी में महिलाओं ने खाना बनाने की कमान संभाली और अपने घरों के बाहर सड़क पर 20 तंदूर लगा दिया। जिसमें सैकड़ों कारसेवकों के लिए रोटियां बनने लगी।

ऐसे में समस्या थी कि उन तक कैसे खाना पहुंचाया जाए। पिता जी के दो मित्र शहर के अलग-अलग समाचार पत्रों के बड़े पत्रकार थे। ऐसे में उनके सहारे चार पहिया का पास बनवाया और उनको साथ लेकर ड्राइवर की तरह शहर में घूम-घूम कर कारसेवकों को भोजन पहुंचाने में जुट गया।
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