कहते हैं कि अगर भगवान को सच्चे दिल से याद करो, तो वह किसी न किसी रूप में सहायता करने आ जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ भारतीय जीवन बीमा निगम के कार्पोरेट क्लब में काम करने वाले बृजराज तिवारी के साथ, जिनके हृदय में बसे भगवान राम के प्रति सच्ची आस्था और विश्वास ने उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाल दिया।
रामकृपा से जिंदगी बचने के बाद प्रभु भक्ति के प्रति आस्था और भी अधिक मजबूत हो गई। उन्होंने बीड़ा उठा लिया कि वह घर-घर नि:शुल्क सुंदरकांड का पाठ करेंगे और अधिक से अधिक लोगों को राम की भक्ति से जोड़ेंगे। अब वह हर महीने करीब एक दर्जन से अधिक घरों में सुंदरकांड का पाठ करते हैं। इतना ही नहीं वह अकेले इस मुहिम में बढ़े थे, लेकिन अब उनके साथ सैकड़ों लोग जुड़ गए हैं। जाे मुफ्त सुंदर कांड का पाठ करते हैं।
जॉर्जटाउन निवासी बृजराज तिवारी ने अपने दादी-दादी से सुंदरकांड का पाठ करना सीखा। 2007 में उनकी दादी एक राम चरित मानस कथा के संयोजक की भूमिका में थीं। इस कथा में भजन गायक रविंद्र जैन को शामिल होना था। उसी दौरान बृजराज तिवारी को डेंगू हो गया। वह प्रयागराज के दूसरे डेंगू मरीज थे। वहीं, हालत बिगड़ने पर उन्हें एसआरएन से लखनऊ पीजीआई के लिए रेफर कर दिया गया।
वह 25 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहे। जिसमें सात दिनों तक, तो उन्हें होश भी नहीं आया और उनका प्लेटलेट लगातार गिर रहा था। घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। ऐसे में जब उन्हें सात दिनों बाद जब होश आया, तो वह प्रभु श्रीराम का ध्यान करने लगे। इसके बाद मानो चमत्कार हो गया।प्लेटलेट घटने के बजाए बढ़ने लगी। जहां मौत की आशंका थी, वहां जिंदगी मिल गई।
इसके बाद उन्होंने घर-घर सुंदरकांड पाठ करने का बीड़ा उठाया। मौजूदा समय सैकड़ों लोग उनके साथ इस मुहिम में जुड़ गए हैं। अब परिवार की आर्थिक स्थित भी बेहतर हो गई है। बृजराज तिवारी कहते हैं, कि उनका जीवन ही भगवान राम के चरणों में समर्पित है। वह वर्षों से निरंतर सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं। वह कहते हैं कि कोई भी काम हो उनके लिए पहले सुंदर कांड का पाठ जरूरी और कुछ नहीं।