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सबके राम: अयोध्या से लेकर सात समंदर पार नीदरलैंड्स तक श्रीराम की जय-जयकार, प्राण प्रतिष्ठा को लेकर है उत्साह

Sun, 14 Jan 2024 11:47 AM IST
चमन शर्मा इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

नीदरलैंड्स में युतरेखत्र के पास ब्रऊकेलन गोपालन की धरती पर काशी के पंडित शंकर उपाध्याय के साथ 10 वर्ष पहले श्रीराम मंदिर और सभाकक्ष की स्थापना की, जहां से सनातन धर्म का प्रचार हो रहा है। नीदरलैंड्स के ख्रोनिंग शहर के पास एक चर्च खरीदा और तीन साल पहले वहां श्रीराम मंदिर की स्थापना की। मंदिर में श्रीराम दरबार सजाया। शिवलिंग की स्थापना की। सूरीनाम में रामलीला मंचन बड़े पैमाने पर होता है।
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राम मंदिर अयोध्या - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को हो रही है। भारत के साथ सात समंदर पार भी श्रीराम की जय-जयकार हो रही है। वह चाहे सूरीनाम हो या नीदरलैंड्स। इन जगहों पर भी अयोध्या में हो रहे श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा उत्सव को लेकर उत्साह है। 22 वर्षों से नीदरलैंड्स में रहने वालीं एएमयू के हिंदी विभाग के शोधार्थियों की पर्यवेक्षक रहीं प्रो. पुष्पिता अवस्थी बोलीं-श्रीराम से उनका जन्म-जन्मांतर का नाता है। वर्ष 2016 में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए जब शिलाएं तैयार की जा रहीं थीं, उस वक्त वह अयोध्या गईं थीं। अब वह नीदरलैंडस से वापस आने के बाद वहां जाएंगी। उन्होंने कहा कि श्रीराम की जीवन संस्कृति ही भारतीय संस्कृति की परिचायक है। जिसमें निषादराज, अहिल्या, शबरी से लेकर सु्ग्रीव और विभीषण सहित सबका कल्याण होता है।

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इन दिनों प्रो. अवस्थी भारत में हैं। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि रामलला प्राण प्रतिष्ठा होने से उनका मन प्रफुल्लित है। इस क्षण का लंबे समय से इंतजार कर रही थीं। वह श्रीराम भक्त हैं। उनमें जो ऊर्जा का संचार हो रहा है, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकतीं। 22 जनवरी को श्रीराम अपने मंदिर में विराजेंगे, जो अब तक टेंट में थे। उन्होंने कहा कि श्रीराम के जीवन से जुड़े स्थलों, पर्वतीय चिन्हों का अन्वेषण किया है, जो श्रीरामचरितमानस सहित उनकी पुस्तक में उल्लेखित है। 

नीदरलैंड्स में युतरेखत्र के पास ब्रऊकेलन गोपालन की धरती पर काशी के पंडित शंकर उपाध्याय के साथ 10 वर्ष पहले श्रीराम मंदिर और सभाकक्ष की स्थापना की, जहां से सनातन धर्म का प्रचार हो रहा है। नीदरलैंड्स के ख्रोनिंग शहर के पास एक चर्च खरीदा और तीन साल पहले वहां श्रीराम मंदिर की स्थापना की। मंदिर में श्रीराम दरबार सजाया। शिवलिंग की स्थापना की। सूरीनाम में रामलीला मंचन बड़े पैमाने पर होता है। जिसमें वह विशेष रूचि रखतीं हैं।
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कौन हैं प्रो. पुष्पिता
कानपुर में 14 जनवरी 1960 को जन्मी डॉ. पुष्पिता अवस्थी बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वसंता कॉलेज में हिंदी विभाग की अध्यक्ष रही हैं। वर्ष 2001 से 2005 तक सूरीनाम में भारतीय दूतावास में भारतीय संस्कृति केंद्र की पहली सचिव रहीं थीं। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। उन्होंने नीदरलैंड्स में वर्ष 2006 में हिंदी यूनिवर्स फाउंडेशन स्थापित किया, जिसकी वह निदेशक हैं।
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इन पुस्तकों की रचयिता
प्रो. पुष्पिता अवस्थी ने “छिन्नमूल”, “समंदर पार में भारतीय मन : प्रवासी साहित्यकार पुष्पिता अवस्थी”, “आंखों की हिचकियां”, “सेपरेटेड इमोशंस”, “सूरीनाम का सृजनात्मक साहित्य” “अनुभव और अनुभूतियां”, “भारतवंशी भाषा एवं संस्कृति” पुस्तकें लिखीं हैं।

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