हमारे अलावा किसकी हिमाकत है जो रामजी से धान कुटवा दे। यह सौभाग्य तो केवल मिथिला की नारी को ही मिला है। मैं भी मिथिला की नारी हूं और भगवान राम को हमने जमाई की तरह जिया है। यहां की हर बेटी सियाजी हैं। रामजी तो मिथिला के पाहुन (दामाद) हैं तो अवध में वह दशरथ नंदन श्रीराम हैं। यह कहते हुए लोकगायिका शारदा सिन्हा के की आवाज में मिथिलांचल के भाव और उल्लास को आसानी से महसूस किया जा सकता है।
पीएम की अपील पर शबरी जोहेली बटिया किया रिकॉर्ड
पीएम मोदी की अपील पर शारदा सिन्हा ने भी अपनी आवाज में गीत रिकॉर्ड किया है। वह भोजपुरी में गुनगुनाती हैं, अपना रामजी के शबरी जोहेली बटिया, हे जोहेली बटिया, अपना रामजी के शबरी जोहेली बटिया, लामी लामी केसिया शबरी झाड़ी के बहारे हो रामा, एहि बाट अइहें रघुनंदन रसिया। कहती हैं, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आने का निमंत्रण तो मिला है, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से नहीं आ पाने का दुख मन में है। बहुत मन था कि जब पूजा हो रही हो तब मैं गाती।
गिरमिटिया भी साथ ले गए रामायण : शारदा सिन्हा कहती हैं कि लोक और लोकगीतों में राम बसे हुए हैं। भोजपुरी पट्टी में तो राम व रामायण को लोगों ने जिया है। रामचरित्र को आत्मसात किया है। यहां तक कि देश के बाहर जो गिरमिटिया गए, वे भी अपने साथ रामायण ले गए। वह गुनगुनाती हैं...तोरे भाल के चंदनवा राम हिया बस गेल...। इतने सलोने हैं राम।