रामजी सबके हैं। प्राण प्रतिष्ठा से पहले वे सबको कुछ न कुछ दे रहे हैं। कोई हाथ खाली नहीं है। यह कहना है कि हनुमान गढ़ी की सौ साल पुरानी प्रसाद की दुकान चलाने वाले राकेश गुप्ता का। कहते हैं पिछले एक साल में प्रसाद की बिक्री दस गुना तक बढ़ गई है। दुकान पर राकेश दसवीं पीढ़ी हैं और बेटा भी 11वीं पीढ़ी के रूप काम संभाल रहा है।
राकेश कहते हैं कि पहले सभी दुकानें जीर्ण-शीर्ण अवस्था में थी। महंत ज्ञानदास महाराज के आदेश पर सभी ने उन्हें नए सिरे से बनवा लिया है। बताते हैं कि उनके पूर्वज लकड़ी की डोलची लेकर बैठते थे। मंदिर के ठीक सामने विकास गुप्ता की प्रसाद की दुकान है। वह 35 सालों से हैं। कहते हैं कि रामजी की कृपा हो गई है, चार साल पहले तक पांच किलो भी देशी घी के लड्डू बिक जाते थे, तो ईश्वर को धन्यवाद देते थे। अब रोज 21 किलो भी कम पड़ जाते हैं। पहले सालभर सिर्फ कार्तिक पूर्णिमा स्नान मेले का इंतजार होता था, अब तो रोज ही मेला है।
दोगुनी हो गई बिक्री
प्रसाद व्यापार से जुड़े व्यापारी बताते हैं कि हनुमान गढ़ी पर प्रसाद की 160 दुकानें हैं। राम की पैड़ी, सरयू घाट पर नागेश्वर मंदिर के आसपास 20 दुकानें और रामपथ व कनक भवन पर 10-10। कहते हैं, राममंिदर पर फैसला आने के बाद प्रसाद की बिक्री दोगुनी हो गई है। प्रसाद भी महंगा हुआ है।
जबसे प्राण प्रतिष्ठा की तिथि घोषित हुई है, बिक्री दस गुना बढ़ गई है। पहले सालाना 25 करोड़ रुपये का प्रसाद व्यापार था। अब दो करोड़ रुपये पहुंच चुका है। पिछले एक साल में दुकानों का किराया भी दस गुना तक महंगा हो गया है। वहीं, फूलों के साथ माला की बिक्री भी बढ़ गई है।
राकेश बताते हैं कि पहले हनुमान गढ़ी पर फूल माला की करीब 60 दुकानें तक थीं। अब 100 हैं। ऐसे ही छोटी देवकाली पर दस, नागेश्वर नाथ मंदिर, सरयू पर 30 व कनक भवन में पांच दुकानें। पहले एक माली दो से तीन किलो तक फूल की बिक्री करते थे। अब बिक्री 15 किलो से 30 किलो तक पहुंच गई है।