नासिक के कालामंदिर की पंचवटी में विशेष अनुष्ठान के दौरान पीएम मोदी।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए नासिक के जिस कालामंदिर के पंचवटी से 11 दिन का विशेष अनुष्ठान शुरू किया, उसी मंदिर में प्रवेश के लिए 93 साल पहले बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को प्रदर्शन करना पड़ा था। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दिव्य वातावरण में यहां पूजा कर खुद को धन्य महसूस कर रहा हूं। भारतीयों की शांति और भलाई के लिए प्रार्थना की। संत एकनाथ लिखित भावार्थ रामायण के छंदों को सुनने का अनुभव हुआ, जिसमें प्रभु राम की अयोध्या में विजयी वापसी का वर्णन किया गया है। भक्ति और इतिहास से गूंजता यह पाठ एक बहुत ही खास अनुभव था। इस दौरान पीएम मोदी ने झांझ-मजीरे भी बजाए।
मोदी ने बजाए झांझ-मजीरे
पीएम मोदी शुक्रवार को नासिक में दो किमी के रोड शो के बाद रामकुंड व श्रीकालाराम मंदिर पहुंचे। रामकुंड में नासिक पुरोहित संघ के अध्यक्ष सतीश शुक्ला ने पीएम मोदी को पारंपरिक पगड़ी भेंट की। पीएम ने वहां जल पूजन और आरती की। पीएम ने यहां साफ-सफाई कर देशभर के मंदिरों काे साफ करने का संदेश दिया।
खास क्यों है कालाराम मंदिर
नासिक में गोदावरी नदी के किनारे बना कालाराम मंदिर उस दंडकारण्य (वन) में पंचवटी क्षेत्र का हिस्सा है, जहां भगवान राम ने वनवास के दौरान कुटिया बनाई थी। यहीं से रावण माता सीता का अपहरण कर ले गया था। श्रीराम ने जहां कुटिया बनाई थी, उस जगह पांच वटवृक्ष (बरगद) थे। इन पेड़ों को बहुत ही पवित्र माना गया है।