रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य अनुष्ठान 22 जनवरी को दोपहर 12:20 बजे प्रारंभ होगा। प्राण प्रतिष्ठा की यह पूजा 40 मिनट तक चलेगी। इसके बाद करीब 75 मिनट पीएम मोदी, सीएम योगी, संघ प्रमुख मोहन भागवत संदेश देंगे। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास आशीर्वाद देंगे।
प्राण प्रतिष्ठा समारोह में अतिथियों को 10:30 बजे तक रामजन्मभूमि परिसर में प्रवेश करना होगा। मंदिर परिसर में आठ हजार कुर्सियां लगाई जा रही हैं। महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों के 25 वाद्य यंत्रों से रामलला का अभिनंदन किया जाएगा।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सोमवार को प्राण प्रतिष्ठा समारोह का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया। उन्होंने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान काशी के प्रख्यात वैदिक आचार्य गणेश्वर द्रविड़ व आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित के निर्देशन में 121 वैदिक आचार्य संपन्न कराएंगे।
प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में 150 से अधिक परंपराओं के संत-धर्माचार्य व 50 से अधिक आदिवासी, गिरिवासी, तटवासी, द्वीपवासी, जनजातीय परंपराओं की उपस्थिति देश के निकटवर्ती इतिहास में पहली बार हो रही है। यह अपने आप में विशिष्ट होगा। मंदिर के निर्माण से जुड़े 500 से अधिक लोग, जिन्हें इंजीनियर ग्रुप का नाम दिया गया है, भी शामिल होंगे।
चंपत राय ने बताया कि सुबह 10 बजे से प्राण प्रतिष्ठा मुहूर्त के ठीक पहले तक लगभग दो घंटे के लिए श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में शुभ की प्रतिष्ठा के लिए मंगल ध्वनि गुंजायमान होगी। विभिन्न राज्यों के 25 प्रमुख और दुर्लभ वाद्ययंत्रों के मंगल वादन से अयोध्या में यह प्रतिष्ठा महोत्सव होगा। इसे उन वाद्यों के दक्ष कलाकार प्रस्तुत करेंगे। इस मांगलिक संगीत कार्यक्रम के परिकल्पनाकार और संयोजक यतींद्र मिश्र हैं, जो प्रख्यात लेखक, अयोध्या संस्कृति के जानकार और कलाविद् हैं। इस कार्य में उनका सहयोग केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली ने किया है।
इन वाद्ययंत्रों से मंगलगान
यूपी-बिहार से पखावज, बांसुरी और ढोलक, कर्नाटक की वीणा, महाराष्ट्र की सुंदरी, पंजाब के अलगोजा, ओडिशा के मर्दल, कश्मीर के संतूर, मणिपुर के पुंग, असम के नगाड़ा, काली, छत्तीसगढ़ के तंबूरा, दिल्ली की शहनाई, राजस्थान का रावणहत्था, पश्चिम बंगाल का श्रीखोल, सरोद, आंध्रप्रदेश का घटम, झारखंड का सितार, गुजरात का संतार, तमिलनाडु का नागस्वरम, तविल और मृदंगम, उत्तराखंड का हुड़का।
शैव से गायत्री परिवार तक की परंपराएं
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित होने वाली परंपराओं में शैव, वैष्णव, शाक्त, गणपत्य, पत्य, सिख, बौद्ध, जैन, दशनाम शंकर, रामानंद, रामानुज, निंबार्क, मद्धव, विष्णु नामी, रामसनेही, घीसा पंथ, गरीबदासी, गौड़ीय, कबीरपंथी, वाल्मीकि, असम से शंकरदेव, माधवदेव, इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन, चिन्मय मिशन, भारत सेवाश्रम संघ, गायत्री परिवार, अनुकूल चंद ठाकुर परंपरा, ओडिशा का महिमा समाज, पंजाब से अकाली, निरंकारी, नामधारी, राधास्वामी व स्वामीनारायण, वाराकरी, वीर शैव आदि हैं।