हरियाणा में एक राज्यसभा सीट निकालने के लिए कांग्रेस को 31 विधायकों का मत जुटाना होगा। फिलहाल पार्टी के पास यहां 30 विधायक हैं यानी एक मत से पहले ही वह पीछे है। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि कुमारी सैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला की जगह भूपेंद्र हुड्डा के अपने पुत्र दीपेंद्र हुड्डा को उम्मीदवार बनाने से फूट पैदा हुई है। इससे कुछ विधायक क्रास वोटिंग कर सकते हैं। जाहिर है क्रास वोटिंग होने पर दीपेंद्र की राह मुश्किल हो जाएगी।
राजस्थान में भी हरियाणा जैसा समीकरण
हरियाणा और राजस्थान में एक जैसा ही समीकरण है। चर्चा है कि डिप्टी सीएम सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायक सीएम अशोक गहलोत के करीबी नीरज डांगी को उम्मीदवार बनाने से खुश नहीं है। ऐसे में यहां भी भाजपा को पायलट गुट के विधायकों की क्रास वोटिंग की उम्मीद है। इसी कारण भाजपा ने राजस्थान में अपना दूसरा उम्मीदवार भी उतार कर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।