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REET paper leak case: भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के घर की दीवार पर लिखा- 'नाथी का बाड़ा'

Thu, 03 Feb 2022 04:39 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर

सार

इससे पहले यह लोकोक्ति तब सुर्खियों में आई थी जब शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ही थे। उनके आवास पर ज्ञापन देने आए शिक्षकों से उन्होंने कहा था कि, क्या उनके घर को 'नाथी का बाड़ा' समझ रखा है? 
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इस तरह दीवार पर लिखा नाथी का बाड़ा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रीट पेपर लीक मामले में भाजपा का विरोध थम नहीं रहा है। सोमवार को जयपुर में भाजपा और युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज का असर जिले में भी देखा गया। युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने विरोध करते हुए जिले में स्थित कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के आवास की बाहरी दीवार पर ‘नाथी का बाड़ा’लिख दिया। दीवार के साथ-साथ घर के बाहर लगे बोर्ड पर भी यह लिखा गया है। 

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'नाथी का बाड़ा' इससे पहले तब सुर्खियों में आया जब शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ही थे। उनके आवास पर ज्ञापन देने आए शिक्षकों से उन्होंने कहा था कि, क्या उनके घर को 'नाथी का बाड़ा' समझ रखा है? इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। नाथी का बाड़ा का मतलब, ऐसा स्थान जहां आपको जो चाहिए मिल जाए होता है।

जानें...क्या है नाथी का बाड़ा और उसका मतलब
राज्य में 'नाथी का बाड़ा' सिर्फ एक कहावत (लोकोक्ति) ही नहीं बल्कि किस्सा है, इसका इतिहास 150 से 200 साल पुराना है। यह लोकोक्ति नाथी बाई नाम की एक महिला से शुरू हुई थी। वे पाली जिले की रोहट तहसील के गांव भांगेसर की रहने वाली थीं। करीब 100 साल पहले उनका निधन हो गया, लेकिन भांगेसर में उनका परिवार आज भी रहता है। कहते हैं कि नाथी बाई दानशीलता की देवी थीं। जरूरतमंदों के लिए उनके घर के कमरे अनाज से भरे रहते थे। दान करते समय वे न तो अनाज को तोलती और न ही नोटों को गिनती थीं। मदद के लिए आए लोगों को वे मुट्ठी में भरकर रुपए देती थीं। ऐसे में उनके घर को 'नाथी का बाड़ा' कहा जाने लगा था। बाड़ा यानी ऐसी जगह जहां से कोई भी कभी भी मदद ले सकता है।
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आज भी रहता है परिवार
रियासतकाल में बना नाथी बाई का घर जर्जर हो जाने से उनके परिवार के सदस्यों ने उसका नवीनकरण करवाकर वहां अब पक्के मकान बनवा लिए हैं। घर के प्रवेश द्वार पर लगाए गए पत्थर पर आज भी 'नाथी भवन' लिखा हुआ है। घर की ओर जाने वाली गली शुरू होते ही एक चबूतरा भी है, जिसे उनकी बेटी की शादी में व्रत पालन के लिए बनाया गया था। नाथी बाई के पड़पौते नरसिंहराम (69) और उनकी पत्नी गंगा ने ने बताया कि नाथी भवन में मां की बैठक भी बनी हुई थी। कहा जाता है कि नाथी मां ने बेटी की शादी में 60 गांवों के लोगों को बुलाया था। स्नेह भोज में घी की नालियां बही थीं, बहता हुआ घी गांव के प्रवेश द्वार (फला) तक पहुंच गया था।

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