वर्ल्ड ल्यूपस डे पर मंगलवार को एसएमएस अस्पताल के आईएमए हॉल में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल डॉ. सुधीर भंडारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, ल्यूपस से पीड़ित लोग चिंता न करें। गाल और नाक पर तितली की आकृति वाले चकते होना, नींद न आना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, थकावट, बाल गिरना आदि ल्यूपस के सामान्य लक्षण हैं। ल्यूपस से पीड़ित व्यक्ति को समय पर इलाज मिले और वह पौष्टिक भोजन करे तो वह नार्मल जिंदगी जी सकता है।
उन्होंने कहा कि समय पर इलाज लेकर इस बीमारी के कारण किडनी और अन्य अंगों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है। एसएमएस अस्पताल में इस बीमारी के लिए विशेष डिपार्टमेंट होने से लोगों को बेहतर इलाज मिल रहा है।
रूमेटोलॉजी एंड क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी डिपार्टमेंट की विभागाध्याक्ष डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि ल्यूपस लम्बे समय तक चलने वाली एक ऑटो इम्यून डिजीज है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली पर असर डालती है। जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बदलती है तो एंटीबॉडी कई बार शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला कर देते हैं, क्योंकि वे बाहरी पदार्थों और स्वस्थ उतकों में अंतर नहीं कर पाते हैं।
उन्होंने बताया कि इस बीमारी में लोगों के त्वचा पर विशेषकर चेहरे पर लाल निशान या चकते हो जाते हैं। ल्यूपस सिर से लेकर पांव तक सभी अंगों को प्रभावित कर सकता है। यह एक जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन संक्रमण और जटिलताएं होने पर मौत भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि 90 प्रतिशत रोगी महिलाएं होती हैं, लेकिन पुरूषों को भी ल्यूपस हो सकता है।
सीनियर प्रोफेसर मेडिसिन डॉ. पीडी मीना ने बताया, विश्व की कई हस्तियां जैसे सैलेना गोमेज, क्रिस्टन जोनसन, टोनी ब्रेक्सटन, माइकल जैक्सन, लेडीगागा को ल्यूपस हुआ था, लेकिन इन्होंने बीमारी को हावी नहीं होने दिया और नार्मल जिंदगी जीते हुए विश्व में खूब नाम कमाया। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के इलाज में डाइट का महत्वपूर्ण योगदान है। पर्याप्त कार्बोहार्डड्रेड, फैट और प्रोटीन युक्त भोजन लेना चाहिए। ज्यादा शुगर, नमक और प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए।
जूही बोलीं- मेरा पुर्नजन्म हुआ
ल्यूपस का उपचार ले रही जूही ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, मेरा पुर्नजन्म हुआ है, डॉक्टरों के नियमित इलाज, अच्छी डाइट, परिवार और दोस्तों के साथ से मैं आज नार्मल जिंदगी जी रही हूं। मेरी तरह कोई भी व्यक्ति जिसको ल्यूपस है वह नार्मल जिंदगी जी सकता है, लेकिन इसके लिए उसे नियमित इलाज लेने के साथ खानपान पर भी ध्यान देना होगा।