योग गुरू बाबा रामदेव की सिफारिश पर भाजपा से मिली टिकट के बाद लगातार विरोध झेल रहे स्वामी सुमेधानंद ने अपने जाट होने का प्रमाण पत्र दिखाया।
उन्होंने कहा कि वे आर्य समाजी हैं और जाति-धर्म को नहीं मानते, लेकिन कुछ लोगों के षडयंत्रपूर्वक हो रहे विरोध के चलते मजबूरी में जाति प्रमाण पत्र मंगवाना पड़ा।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे चोरी करके टिकट नहीं लेकर आए हैं। यदि विरोध करना है तो उनका करो, जिन्होंने मुझे टिकट दिया। पत्थर फेंकने हैं, तो राजनाथ, मोदी, वसुंधरा राजे की गाड़ी पर फेंके।
सीकर किसी की बपौती नहीं है। वह पिछले 20 वर्षों से सेवा कर रहे हैं। वैसे भी संत की कोई जाति, धर्म और गांव नहीं होता है। टिकट का विरोध करने वाले लोग धरती पर पैदा होने के पहले से ही राजनीति जानते हैं।