राजस्थान के जैसलमेर में धुआंधार चुनाव प्रचार के बीच जाति और धर्म आधारित राजनीति के विरोध में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा चलाये जा रहे वोट फॉर नोटा अभियान की भी इन दिनों खूब चर्चा है और इससे मुख्य पार्टियों खासकर भाजपा और कांग्रेस के लिए थोड़ी असहज स्थिति पैदा हो गई है। इस अभियान को चला रहे लोग मतदाताओं से किसी भी राजनीतिक दल को वोट नहीं करने और नोटा का बटन दबाने की अपील कर रहे हैं। अभियान के तहत जैसलमेर शहर और आसपास के इलाकों में लोग 'वोट फॉर नोटा' लिखी पर्चियां बांट रहे हैं तो कुछ लोग इस मुहिम के समर्थन में नारे लिखी हुई टीशर्ट पहनकर घूम रहे हैं। यही नहीं, यूट्यूब और सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों के माध्यम से भी लोगों तक इस अभियान को पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
कुछ हफ्ते पहले स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विमल गोपा ने की थी। शुरू में इस अभियान से एससी-एसटी कानून के मामले में राजनीतिक दलों का रुख करने वाले कुछ लोग जुड़े थे, लेकिन धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ गया और समाज के अलग-अलग तबकों के लोग अपने-अपने मुद्दों को लेकर इसका हिस्सा बन गए।
जैसलमेर की भाजपा इकाई के अध्यक्ष जुगल किशोर ने कहा कि हम इन लोगों से यह कह रहे हैं कि नोटा का बदन दबाना कोई समाधान नहीं है। हमने इन लोगों से मुलाकात की है। आशा है कि ये लोग भाजपा के पक्ष में अपनी मत देंगे। उधर, जैसलमेर युवा कांग्रेस के अध्यक्ष विकास व्यास ने जिले में भाजपा पर जाति और धर्म की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोग भाजपा की राजनीति को खारिज कर रहे हैं। हम आशा करते हैं ये सारे लोग आखिर में कांग्रेस की तरफ रुख करेंगे क्योंकि हम सबको साथ लेकर चलने और विकास की राजनीति करते हैं।