वसुंधरा राजे प्रतापगढ़ जिले के होरी गांव में मुरलीधर जी महाराज के रामकथा कार्यक्रम में में बोल रही थीं। उनके साथ पूर्व मंत्री श्रीचंद कृपलानी थे। राजे ने होरी के हनुमान जी के दर्शन भी किए। उन्होंने प्रतापगढ़ में पूर्व मंत्री की कुशल क्षेम पूछने के बाद लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘आज कल तो एक ही शोर, अली बाबा चालीस चोर’। राजस्थान में ऐसे ही लोगों के हाथ में कमान है। इन्होंने सोच लिया आना तो है ही नहीं, खाओ और मौज उड़ाओ।
राजे ने कथा के समापन में कहा कि भगवान राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और हनुमान हमें हर मुश्किल में मज़बूती के साथ मुक़ाबला करने की सीख देते हैं। राम ने वनवास जाकर सिद्ध किया कि वे दशरथ के आज्ञाकारी पुत्र हैं। उन्होंने शबरी के जूठे बेर खाकर जात-पांत से ऊपर उठने का संदेश दिया। वनवास राम को मिला था, सीता और लक्ष्मण को नहीं। फिर भी वे उनके साथ गए। एक ने पत्नी और एक ने भाई का धर्म निभाया। राजतिलक भरत का होना था, लेकिन भरत इसके लिए तैयार नहीं थे।
उन्होंने भगवान की चरण पादुकाएं सिंहासन पर रख कर ही राज्य चलाया। जबकि आज मौक़ा मिलते ही लोग कुर्सी हथियाने की कोशिश में लग जाते हैं। वफ़ादारी का कभी कोई ज़िक्र होता है, तो सर्व प्रथम राम भक्त हनुमान का ही नाम आता है। लेकिन आज कल तो सबसे पहले वे ही साथ छोड़ते हैं, जिनको आपने हनुमान बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि जिस पर भगवान की कृपा है, उसे किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है। जीत हमेशा उसी की होती है।