राजस्थान में भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार वसुंधरा राजे अपने पड़ोसी राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर चुनावी जंग में उतरी हैं।
प्रदेश को कांग्रेस से छीनने के लिए चुनावी बिगुल बजा चुकीं वसुंधरा प्रदेश की अस्मिता को लेकर ‘नया राजस्थान’ और ‘राजस्थान गौरव’ जैसे नारे पर ज्यादा जो दे रही हैं।
पिछली दफा मामूली अंतर से सत्ता से दूर रह गईं वसुंधरा इस बार कुछ बदली-बदली सी दिख रही हैं। लोगों का कहना है कि ‘धौलपुर की रानी’ इस बार पहले से नरम दिख रही हैं।
इस बार वे ‘मैं’ की बजाए ‘टीम’ की बात कर रही हैं। रथयात्रा के दौरान वह लोगों से कह रही हैं कि आप और हम (भाजपा) एक टीम हैं।
यह टीम मिलकर काम करे तो कांग्रेस की सत्ता से मुक्ति मिल सकती है। जिस तरह से मोदी गुजरात के स्वाभिमान की बात करते रहे हैं, ठीक उसी तर्ज पर वसुंधरा भी राजस्थान गौरव की बात कर रही हैं।
लोग भी खासतौर पर महिलाएं उनकी बातों को चाव से सुन रही हैं। वसुंधरा कहती हैं कि कांग्रेस भला क्या नया राजस्थान बनाएगी, नया राजस्थान तो भाजपा बनाएगी। पिछले चुनाव में कांग्रेस से शिकस्त की एक बड़ी वजह प्रदेश भाजपा की गुटबाजी को माना गया था।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस बार इस गुटबाजी को दूर कराने की जो कोशिश की थी, वह कुछ रंग लाती दिख रही है।
वसुंधरा के सबसे प्रबल विरोधी गुलाब चंद कटारिया इस बार उनके साथ दिख रहे हैं। वे मेवाड़ क्षेत्र में वसुंधरा के साथ यात्रा में भी चल रहे हैं, लेकिन एक अन्य नेता धनश्याम तिवारी अब भी नाराज बताए जा रहे हैं।
वे रथयात्रा के शुभारंभ के मौके पर आयोजित रैली में भी मौजूद नहीं थे। माना जा रहा है कि यदि इस बार प्रदेश भाजपा गुटबाजी से पार पा गई तो उसके सत्ता में लौटने के पूरे आसार हैं।
विधानसभा चुनाव में महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। सत्ता विरोधी फैक्टर के साथ ही बिजली संकट के सवाल को भाजपा बड़ा मुद्दा बनाने में सफल होती दिख रही है।