रूस ने यूक्रेन के सूमी शहर में स्थित भारतीय कारोबारी की औषधि निर्माण इकाई पर घातक ड्रोन हमला किया है। यह संयंत्र राजस्थान के भरतपुर निवासी व्यवसायी राजीव गुप्ता का है। इस हवाई हमले में कारखाने का मुख्य भवन बुरी तरह तबाह हो गया और कंपनी को शुरुआती अनुमान के अनुसार कम से कम 400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। हमले के दौरान इकाई के एक इंजीनियर की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं।
घटना के समय राजीव गुप्ता यूक्रेन की राजधानी कीव में मौजूद थे और पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनके चचेरे भाई राजकुमार गुप्ता ने बताया कि सूमी स्थित यह संयंत्र रूसी सीमा से महज 23 किलोमीटर दूर है और हमले के बाद कारखाने से धुएं का विशाल गुबार उठता दिखाई दिया। अधिकारियों के अनुसार हताहतों की संख्या में बदलाव संभव है। भीषण तबाही के कारण संयंत्र में दवाओं का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया है।
मुख्य संयंत्र को भारी क्षति और परिचालन बंद
तबाही का शिकार बनी यह औषधि इकाई 'कुसुम ग्रुप' का प्रमुख विनिर्माण केंद्र थी। यह संस्थान स्वयं को भारतीय जड़ों वाली यूक्रेनी दवा कंपनी बताता है। दोनों देशों के मध्य छिड़े युद्ध के बावजूद सूमी शहर की यह फैक्टरी लगातार चल रही थी। हालांकि इस ताजा ड्रोन प्रहार में मुख्य इमारत का अधिकांश भाग ध्वस्त हो जाने से कारखाने का मुख्य कामकाज बंद हो गया है। कुसुम ग्रुप का कारोबार भारत से दवाओं के वितरण के साथ शुरू हुआ था।
वर्ष 2002 में कंपनी ने अन्य संस्थानों की औषधियां बेचना बंद कर अपने ब्रांड की मार्केटिंग शुरू की। इसके बाद वर्ष 2007 में भारत में अपना पहला संयंत्र स्थापित किया। वर्ष 2009 में कंपनी ने यूक्रेन के सूमी में दवा विनिर्माण कारखाना खोला। वर्तमान में कुसुम ग्रुप जेनेरिक दवाओं के 50 से अधिक ब्रांड बनाता है, जिनमें टैबलेट, कैप्सूल और लिक्विड औषधियां शामिल हैं। कंपनी की भारत में दो उत्पादन सुविधाएं राजस्थान के भिवाड़ी और मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित पीथमपुर में हैं। इस समूह के उत्पाद यूक्रेन के अलावा उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और फिलीपींस सहित नौ से अधिक देशों में बिकते हैं।
भरतपुर से यूक्रेन तक व्यावसायिक सफर
भरतपुर निवासी व्यवसायी राजीव गुप्ता ने शुरुआत में भारत से दवाओं का आयात करके अपना व्यापार आरंभ किया था। इसके पश्चात वर्ष 2009 में उन्होंने यूक्रेन के सूमी में अपनी विनिर्माण फैक्टरी स्थापित की। उनके चचेरे भाई राजकुमार गुप्ता ने स्पष्ट किया कि राजीव गुप्ता कीव में पूरी तरह सुरक्षित हैं। रूसी सीमा के अत्यधिक समीप होने के कारण यह क्षेत्र हमेशा जोखिम में रहा, फिर भी कारखाने में जीवनरक्षक औषधियों का निर्माण जारी था। इस ड्रोन हमले में कारखाने के एक अधिकारी की मृत्यु हो गई और अन्य कर्मचारी घायल हो गए। मुख्य इमारत तबाह हो जाने से कंपनी को करीब 400 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। प्रभावित परिसर से मलबा हटाने तथा क्षति के विस्तृत मूल्यांकन का काम किया जा रहा है।
हवाई हमलों और रक्षा प्रणाली की चुनौतियां
यूक्रेन में चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच रूस लगातार घातक हथियारों से हमला कर रहा है। गर्मियों के मौसम से ही रूसी सेना प्रतिदिन बड़ी संख्या में जेट चालित 'शहीद' ड्रोन भेज रही है। ये ड्रोन कम लागत वाले होते हैं और तेजी से निशाना साधते हैं। यूक्रेन की वायु रक्षा टीमों को इन ड्रोन को रोकने में कठिनाई आ रही है, क्योंकि यूक्रेनी इंटरसेप्टर ड्रोन की रफ्तार शहीद ड्रोन से धीमी है। इस बीच यूक्रेन ने पहली बार अपनी स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल एफपी-7 का युद्ध में इस्तेमाल करने की घोषणा की है। इस मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 250 किलोमीटर है।