कई सवाल अनसुलझे
दूसरी ओर पुलिस ने थ्योरी दी कि सरकार ने रेलवे जमीन अधिगृहित की थी। मुआवजा नहीं मिलने से नाराज धूलचंद ने रेलवे ब्रिज उड़ाने की कोशिश की पर पुलिस की इस खुलासे पर सवाल उठ रहे हैं। अब भी कई गुत्थी अनसुलझी है। धूलचंद के पिता का कहना है कि मेरे नाम से तो कोई जमीन ही नहीं है। वो तो बड़े भाई के नाम थी।
आरोपी के पिता ने कहा-हम मुआवजे का हकदार नहीं थे
धूलचंद के पिता ने बताया कि भूमि अधिग्रहण के बाद वे लोग मुआवजे के हकदार नहीं थे क्योंकि जमीन भाई के नाम पर थी। फिर भी हिंदूस्तान जिंक ने शर्त के आधार पर नौकरी दी थी लेकिन पिता के भाई के शिकायत पर उन्हें निलंबित कर दिया गया था। पता नहीं क्यों धूलचंद जमीन के कागज लेकर घूमता रहता था। उससे जमीन के दस्तावेज को लेकर सवाल करने पर वह टाल जाता था।
क्या है मामला
उदयपुर से अहमदाबाद के बीच नई रेलवे लाइन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर को लोकार्पण किया था। उदयपुर से 35 किलोमीटर दूर सलूम्बर मार्ग पर बने ओढ़ा रेलवे ब्रिज पर बीते शनिवार रात करीब 10 बजे धमाके की आवाज आई। इससे आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ लोग रेलवे ब्रिज पर पहुंचे तो पटरी कई जगह से टूटी हुई मिली। रेलवे लाइन पर बारूद मिला। पुल के नट-बोल्ट भी गायब मिले। ट्रैक पर लोहे की चादर भी उखड़ी मिली। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। इसके बाद रेलवे ने इस ट्रैक से गुजरने वाली सभी ट्रेनों को डायवर्ट कर दिया। आतंकी घटना की आशंका को देखते हुए रविवार सुबह एटीएस की टीम भी पहुंची और मामले की जांच शुरू की। इस मामले में तीन आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।