राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर सोमवार को जनआंदोलन तेज हो गया। कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों ने अलग-अलग जिलों में विरोध प्रदर्शन करते हुए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर पुनर्विचार की मांग उठाई। कई शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए, जबकि कुछ स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण भी नजर आई।
उदयपुर कलेक्ट्रेट पर संयुक्त प्रदर्शन
उदयपुर में जिला कलेक्ट्रेट परिसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं, करणी सेना, विभिन्न सामाजिक संगठनों और अन्य समूहों ने संयुक्त रूप से विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते हुए अरावली को बचाने की मांग दोहराई गई। इसी बीच पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हो गई, जिससे मौके पर अफरातफरी का माहौल बन गया।
पुलिस की कार्रवाई और हिरासत
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने अतिरिक्त जाब्ता तैनात किया। धक्का-मुक्की के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया, जबकि प्रदर्शनकारियों ने इसे आंदोलन दबाने का प्रयास बताया।
प्रदर्शनकारियों की चेतावनी
प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने साफ कहा कि यदि अरावली को कमजोर करने वाले फैसले को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक और उग्र किया जाएगा। सभी संगठनों ने एकजुट होकर अरावली पर्वतमाला के संरक्षण का संकल्प दोहराया और इसे पर्यावरण संतुलन के लिए अनिवार्य बताया।
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पर्यावरण और जल संरक्षण का मुद्दा
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अरावली केवल पहाड़ों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि यह जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन की रीढ़ है। इसके कमजोर होने से भूजल स्तर, वन्यजीव और आसपास के क्षेत्रों की जलवायु पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विवाद की जड़ क्या है?
दरअसल 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार केवल वही भू-आकृति अरावली पर्वत मानी जाएगी, जिसकी ऊंचाई जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक होगी। पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों का दावा है कि इस मानक के लागू होने से अरावली की 90 प्रतिशत से अधिक पहाड़ियां संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएंगी, जिससे खनन और अतिक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
सरकार से पुनर्विचार की मांग
आंदोलनकारी संगठनों ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की कि वे सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करें। उनका कहना है कि यदि फैसले में संशोधन नहीं किया गया, तो अरावली का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा। प्रदेशभर में जारी प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि अरावली के संरक्षण को लेकर जनाक्रोश लगातार बढ़ रहा है।