उदयपुर फायरिंग केस में पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर दलपत सिंह समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से चार पिस्टल और 19 जिंदा कारतूस मिले। आरोपियों से पूछताछ में बदमाश प्रवीण वसीटा की हत्या की साजिश का खुलासा हुआ है।
उदयपुर जिले के हिरणमगरी थाना क्षेत्र में सवा तीन महीने पहले हुए फायरिंग कांड में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। लंबे समय से फरार चल रहे कुख्यात हिस्ट्रीशीटर दलपत सिंह को पुलिस ने दो साथियों- राजेन्द्र सिंह और किशन खटीक के साथ गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को हिरणमगरी क्षेत्र के सब-सिटी सेंटर से पकड़ा गया है। पुलिस ने आरोपियों कब्जे से चार अवैध पिस्टल और 19 जिंदा कारतूस भी जब्त किए हैं।
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यह मामला 23 मार्च का है, जब एक जमीन विवाद को लेकर दलपत सिंह ने अपने गुर्गों से चतर सिंह पर फायरिंग करवाई थी। गोलीबारी की इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी थी। शुरुआती जांच में सामने आया कि दलपत ने डराने-धमकाने की नीयत से यह हमला करवाया था। फायरिंग को अंजाम देने वालों में उसका भांजा रघुवीर सिंह देवड़ा और सुभाष लोहार शामिल थे, जिन्हें पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
वहीं, हिस्ट्रीशीटर दलपत और उसके साथियों की गिरफ्तार के बाद पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी बदमाश प्रवीण वसीटा की हत्या की साजिश भी रच रहे थे। समय रहते अगर इनकी गिरफ्तारी नहीं होती तो जल्द ही उसकी हत्या हो सकती थी।
एसपी योगेश गोयल के अनुसार, मुख्य आरोपी दलपत सिंह नरेश हरिजन गैंग का सक्रिय सदस्य है और 2014 के चर्चित प्रवीण पालीवाल हत्याकांड में भी नामजद आरोपी रहा है। उस हत्याकांड में कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें दलपत की भूमिका बेहद अहम मानी जाती रही है। फिलहाल पुलिस दलपत सिंह से पूछताछ कर रही है। माना जा रहा है कि पूछताछ में गैंग नेटवर्क, अवैध हथियारों की आपूर्ति और जमीन सौदेबाज़ी से जुड़े कई अहम राज खुल सकते हैं।