झीलों की नगरी उदयपुर में इस बार भगवान जगन्नाथ रथयात्रा धर्म, आस्था, इतिहास और मेवाड़ की शाही परंपरा के अद्भुत संगम की साक्षी बनेगी। देश की तीसरी सबसे बड़ी और राजस्थान की सबसे विशाल मानी जाने वाली इस रथयात्रा में पहली बार 375 वर्ष पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ को शामिल किया जाएगा। साथ ही करीब 70 वर्ष बाद मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की ओर से भगवान जगन्नाथ को शाही पोशाक अर्पित करने और 'छेरा पहरा' की परंपरा भी पुनर्जीवित होगी, जिससे इस बार की रथयात्रा विशेष ऐतिहासिक महत्व हासिल कर रही है।
375 साल पुराने रथ पर विराजेंगे भगवान
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर गुरुवार को जगदीश मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के साथ भगवान जुगल जोड़ी सरकार 375 वर्ष पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ पर विराजमान होंगे। रजत और लकड़ी के दोनों रथों की विशेष पूजा-अर्चना के बाद नगर भ्रमण शुरू होगा।
70 साल बाद लौटेगी शाही परंपरा
रथयात्रा से पहले मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की ओर से सिटी पैलेस से भगवान के लिए विशेष शाही पोशाक पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जगदीश मंदिर पहुंचाई गई। पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ भगवान को यह पोशाक अर्पित करेंगे। इसके बाद वे 'छेरा पहरा' (रथ बुहारने की परंपरा) निभाने के साथ महाआरती भी करेंगे। यह परंपरा करीब सात दशक बाद दोबारा शुरू हो रही है।
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शहर के प्रमुख मार्गों से निकलेगी रथयात्रा
रथयात्रा जगदीश चौक से शुरू होकर घंटाघर, बड़ा बाजार, भड़भूजा घाटी, भोपालवाड़ी, तीज का चौक, मंडी की नाल, अस्थल मंदिर, झीणीरेत, आरएमवी चौक, कालाजी-गौराजी, रंगनिवास और भट्यानी चौहट्टा होते हुए पुनः जगदीश मंदिर पहुंचेगी। पूरे मार्ग में श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करेंगे।
संकीर्तन, झांकियां और विदेशी श्रद्धालु होंगे आकर्षण
इस बार रथयात्रा में वृंदावन और श्रीमाधोपुर से आए संत हरिनाम संकीर्तन करेंगे। इसके अलावा विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी, ढोल-नगाड़ों की गूंज, धार्मिक डिजिटल झांकियां और पारंपरिक भजन मंडलियां आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहेंगी।
यहां भी निकलेगी रथयात्रा
सेक्टर-7 स्थित जगन्नाथ धाम से वर्ष 2007 से निकल रही रथयात्रा भी इस बार भव्य रूप में आयोजित होगी। यहां जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर पांच रंगों की विशेष ध्वजा तैयार की गई है। वहीं आयड़ स्थित इस्कॉन मंदिर से निकलने वाली संकीर्तन रथयात्रा में पुणे से आए कलाकार पूरे मार्ग पर आकर्षक रंगोलियां बनाएंगे। फूलों और मोतियों से सजे रथ को खींचने का अवसर श्रद्धालुओं को मिलेगा।
धार्मिक आस्था, मेवाड़ की शाही परंपरा और सदियों पुराने इतिहास के दुर्लभ संगम के कारण इस बार की उदयपुर जगन्नाथ रथयात्रा श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।