Bihar: अफीम किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष दुर्गेश जोशी के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने ज्ञापन में बताया कि वर्ष 2018 से 2024 तक का डोडा-चूरा आबकारी विभाग द्वारा मांगा गया था, लेकिन उचित मुआवजा न मिलने के कारण किसानों ने इसे अपने खेतों में नष्ट कर दिया।
अफीम के डोडा और चूरा के नष्टीकरण के विरोध में उदयपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से आए अफीम उत्पादक किसानों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने टाउनहॉल से रैली निकालकर देहलीगेट होते हुए जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च किया और वहां अतिरिक्त जिला कलेक्टर एवं आबकारी आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन में कानोड़, भींडर, मावली, वल्लभनगर सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों किसान शामिल हुए। किसान अफीम डोडा-चूरा संबंधी नियमों में बदलाव और उचित मुआवजे की मांग कर रहे थे।
यह थीं प्रमुख मांगें
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अफीम किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष दुर्गेश जोशी के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने ज्ञापन में बताया कि वर्ष 2018 से 2024 तक का डोडा-चूरा आबकारी विभाग द्वारा मांगा गया था, लेकिन उचित मुआवजा न मिलने के कारण किसानों ने इसे अपने खेतों में नष्ट कर दिया। ऐसे सभी किसानों की समस्या का समाधान सी-फॉर्म भरवाकर किया जाए।
इसके अलावा किसानों ने मांग की कि वर्ष 2024-25 के लिए डोडा-चूरा भी उचित मुआवजा देकर ही नष्ट करवाया जाए। जोशी ने कहा कि सात साल पुराने डोडा-चूरा को नष्ट करने की बात कही जा रही है, जबकि किसी किसान के घर अनाज तक इतने वर्षों तक नहीं रखा जाता, तो डोडा-चूरा कैसे रखा जाएगा? उन्होंने मांग की कि जिन किसानों के पास छह वर्ष पुराना डोडा-चूरा है, उन्हें भी सी-फॉर्म दिया जाए और मुआवजा प्रदान किया जाए।
यहां होती है अफीम की खेती
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गौरतलब है कि उदयपुर संभाग में अफीम की खेती मुख्य रूप से उदयपुर, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के कुछ क्षेत्रों में की जाती है। यह खेती भारत सरकार से लाइसेंस प्राप्त किसानों द्वारा की जाती है। बिना लाइसेंस अफीम की खेती करना अवैध है और इसके लिए सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।