भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा, राजस्थान ने नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर गुरुवार को राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। संगठन ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने, प्रभावित विद्यार्थियों को न्याय दिलाने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करने की मांग की। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे और जमकर नारेबाजी की।
मोर्चा के जिला संयोजक ने कहा कि नीट पेपर लीक प्रकरण से देशभर के लाखों विद्यार्थियों की वर्षों की मेहनत और भविष्य प्रभावित हुआ है। इस घटना से युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है तथा परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
संगठन ने कहा कि परीक्षा विवाद के बाद कई विद्यार्थी मानसिक तनाव और निराशा का सामना कर रहे हैं। ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और आवश्यक सरकारी सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
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ज्ञापन में क्या मांग की गई?
ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की जांच सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र समिति से कराई जाए, ताकि निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित हो सके। साथ ही पेपर लीक में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित एवं जवाबदेह बनाया जाए।
भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों, युवाओं और अन्य नागरिकों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने तथा गिरफ्तार लोगों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाई समाप्त करने की भी मांग की। संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए।
मोर्चा ने शिक्षाविद् एवं पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक सहित सभी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ संविधानसम्मत और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की अनावश्यक दमनात्मक कार्रवाई नहीं करने की भी मांग की। संगठन ने कहा कि यह मुद्दा केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा हुआ है। इसलिए राष्ट्रपति से पूरे मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।