दयपुर के गोगुन्दा थाने में पुलिस कस्टडी में युवक की मौत पर वार्ता के बाद विवाद थम गया। 30 लाख रुपये मुआवजा, संविदा पर नौकरी पर सहमति के बाद परिजन शव लेने को तैयार हुए।
उदयपुर के गोगुंदा थाना पुलिस की कस्टडी में हुई युवक की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद दो दिन बाद थम गया। उदयपुर के महाराणा भूपाल चिकित्सालय की मोर्चरी में आज पुलिस, राजपूत करणी सेना के पदाधिकारी और परिजनों के बीच सुबह वार्ता का लंबा दौर चला। इसके बाद पुलिस प्रशासन की ओर से मृतक के आश्रितों को 30 लाख रुपये का मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने पर सहमति बन गई। साथ ही मामले में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की भी आश्वासन दिया गया। इसके बाद विरोध पर उतरे समाज के लोग और परिजन शांत हुए। परिजन शव को लेकर रवाना हो गए।
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बता दें कि 25 मई को गोगुंदा थाना पुलिस ने सुरेंद्र सिंह राजपूत को युवती को भगाकर ले जाने के आरोप में गुजरात से दस्तयाब किया था। पुलिस जब सुरेंद्र से पूछताछ कर रही थी तो उसकी तबीयत बिगड़ गई। जहां उसे गोगुंदा हॉस्पिटल ले जाया गया और चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद राजपूत करणी सेना और परिवार के लोग अपनी मांगों को लेकर विरोध पर बैठ गए थे।