दावत-ए-इस्लामी से भी जुड़े थे तार
इससे पहले एटीएस की जांच में भी दोनों हत्यारों का पाकिस्तानी से कनेक्शन होने की बात सामने आई थी। बताया गया था कि आरोपी रियाज और गौस कराची गए थे। वहां दोनों ने 2014-15 में ट्रेनिंग भी ली थी। दोनों हत्यारे पाकिस्तान में दावत-ए-इस्लामी संगठन से भी जुड़े हुए थे। कराची से आने के बाद दोनों आरोपी समाज के युवाओं को अपने धर्म को लेकर कट्टर रहने के लिए भड़का रहे थे। उन्होंने एक व्हाट्स ग्रुप भी बनाया था जिसमें भड़काऊ वीडियो और मैसेज भेजकर युवाओं का ब्रेनवॉश किया जा रहा था। आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में एनआईए को करीब दस संदिग्ध नंबर मिले हैं। इनमें से कुछ पाकिस्तान के भी है। हत्यारों की इन नंबरों पर बात भी हो रही थी।
प्रदेश के आठ जिलों में बना रहे थे स्लीपर सेल
हत्या के आरोपियों के अलसूफा से भी जुड़े होने की बात सामने आई थी। यह संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के रिमोट स्लीपर सेल के तौर पर काम करता है। रियाज पिछले पांच साल से अलसूफा के लिए राजस्थान के आठ जिलों में स्लीपर सेल बना रहा था। रियाज और गौस धर्म के नाम पर युवाओं को उकसा रहे थे। दोनों उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, राजसमंद, टोंक, बूंदी, बांसवाड़ा और जोधपुर में बेरोजगार युवाओं का ब्रेनवॉश कर आईएसआईएस के स्लीपर सेल से जोड़ रहे थे। दोनों को अरब देशों से फंडिग भी मिली थी।