कथाव्यास समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य महाराज
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जो मनुष्य गौसेवा में नहीं लगा हो वह भले ही कितना भी बड़ा, कितना भी धनवान हो यदि वह गौभक्त नहीं है तो वह सौभाग्यशाली नहीं हो सकता। यह बात गुरुवार को प्रबल महाराज की कुटिया में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथाव्यास पूज्य समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज ने कही। आज के समय में वस्तु महत्वपूर्ण बन गई है। वो मूर्ख है जो वस्तु के लालच में पारिवारिक संबंध बिगाड़ लेता है।
कथा व्यास समर्थ त्रयंबकेश्वर चैतन्य जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, सकटासुर, माखन चोरी, पूतना वध, गौचारण लीला व कंस वध के प्रसंग सुनाए। वहीं, काशी की दिव्य आरती व भगवान यज्ञ नारायण की परिक्रमा करके श्रद्धालुओं ने अपने जीवन को सफल बनाया। देर शाम को भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुगण ईश्वर की आराधना में लीन हो गए। इससे पहले तरूण तपस्वी डॉ. गुणप्रकाश चैतन्य जी महाराज ने 44 वर्ष बाद यज्ञ सम्राट प्रबल जी महाराज की पावन धरा पर हो रहे 100 कुंडीय श्री पंचदेव महायज्ञ के सफल आयोजन पर सहयोगियों व इलाका वासियों को शुभाशीष दिया।