गणतंत्र दिवस के अवसर पर चीन ने तिरंगे झंडे की बिक्री के बीच अपनी घुसपैठ कर दी है। राजस्थान में चीन में बने तिरंगे बिक रहे हैं।
पॉलिस्टर से बने इन तिरंगों में इसके मानक आकार का ध्यान नहीं रखा गया है। चाइना में बने इन तिरंगों में अधिकतर का आकार 5 बाई 7.5 इंच है, जो नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है।
जयपुर के झंडा कारोबारी विष्णु अग्रवाल ने बताया कि इस समय देशी उत्पादों के अलावा बाजार में चाइनीज तकनीक से बने तिरंगे भी खूब बिक रहे हैं।
इस समय बाजार में 10 रुपए से लेकर 100 रुपए तक के झंडे उपलब्ध हैं, जिनमें लाइट तिरंगा, टेबल तिरंगा, बैंड्स आदि शामिल हैं।
इन उत्पादों में ये अधिकतर उत्पाद चाइना से बनकर आए हैं। झंडा विशेषज्ञ ज्ञान प्रकाश कामरा ने बताया कि नियमानुसार सरकारी कार्यक्रमों में तो उपयोग लिए जानेवाले तिरंगा खादी का ही होना चाहिए, लेकिन आमजन पर ये नियम पूरी तरह लागू नहीं होता।
नियम कहता है कि जहां तक सम्भव हो तिरंगा खादी का होना चाहिए। लेकिन यदि साइज की बात है, तो चाइना से बनकर आए तिरंगे में आकार तय मानकों का सरासर उल्लंघन कर रहा है।
इन तिरंगों का आयात तुरंत प्रभाव से रुकना चाहिए तथा इन्हें बाजार तक पहुंचानेवालों से लेकर बिक्री करनेवालों तक पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।