कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं टोंक विधायक सचिन पायलट ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, प्रशासन पर अधिकारियों का वर्चस्व बढ़ रहा है और सत्ता के अलग-अलग केंद्र बन गए हैं। मंत्रिमंडल में समन्वय की कमी का खामियाजा प्रदेश की जनता भुगत रही है।
टोंक में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पायलट ने कहा कि भाजपा सरकार को बने एक साल से अधिक हो गया है, लेकिन अब तक कोई उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दो बजट पेश कर चुकी है, जिसमें लाखों नौकरियां देने की घोषणाएं हुईं, लेकिन धरातल पर कोई क्रियान्वयन नहीं हुआ।
केंद्र सरकार की राजस्थान के प्रति बेरुखी
पायलट ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 25 में से 11 सीटों पर हार का बदला भाजपा राजस्थान की जनता से ले रही है। केंद्रीय बजट में राजस्थान का नाम तक नहीं लिया गया, जबकि यह देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां बुनियादी ढांचे, रेल और पुलों की सख्त जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि डबल इंजन की सरकार का दावा करने वाली भाजपा के दोनों इंजन फेल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार रेल के विकास पर ध्यान देने के बजाय फिल्म इंडस्ट्री में अधिक रुचि ले रही है। भाजपा की प्राथमिकताएं जनता की जरूरतों से हटकर मनोरंजन तक सीमित रह गई हैं।
विकास कार्यों की समीक्षा
सचिन पायलट ने टोंक में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा बैठक ली, जिनमें मेडिकल कॉलेज, न्यू हॉस्पिटल, नर्सिंग कॉलेज, बनास नदी पर गहलोत पुल, मिनी फूड पार्क, इंडोर स्टेडियम, सिटी पार्क, धन्ना तलाई ड्रेनेज सिस्टम और रनिंग ट्रैक शामिल हैं। उन्होंने अधिकारियों को इन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, पायलट ने लक्ष्मीपुरा (छानबाससूर्या), सेंतीवास (खरेड़ा) और संवारिया (मालपुरा) जैसे गांवों में विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत कर स्थानीय समस्याओं को सुना और जनता से संवाद किया।
भाजपा सरकार को घेरा
पायलट ने कहा कि प्रदेश सरकार जनता के हितों को केंद्र में रखकर काम करने में असफल रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कांग्रेस जनता के मुद्दों को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।