रूढ़िवादी सोच को मात देता राजस्थान
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टोंक जिले के घाड़ कस्बे में ग्रामीण मनोज कुमार रेगर के निधन के बाद उनकी पगड़ी उनकी नौ साल की नन्हीं बेटी रोहिणी को बांधी गई। मनोज का कोई पुत्र नहीं था। उनके निधन के बाद मां निर्मला देवी और घाड़ गांव के पंचों ने मिलकर यह महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने मनोज की बड़ी बेटी रोहिणी को पिता की पगड़ी बांधी। इस अनूठी पहल के साथ ही परिजनों और ग्रामीणों ने सदियों से चली आ रही रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ दिया।
तोड़ी दी सदियों पुरानी परंपरा
घाड़ गांव के पंचों ने 'पंच परमेश्वर' की भूमिका निभाते हुए समाज में बेटे और बेटी में पूर्ण समानता का संदेश दिया है। आमतौर पर पिता के निधन के बाद पगड़ी बांधने की सामाजिक रस्म केवल पुत्र द्वारा ही पूरी की जाती रही है। हालांकि, इस दुखद समय में गांव के पंचों और परिजनों ने मिलकर नई मिसाल कायम की है। यह फैसला सदियों पुरानी उस रूढ़िवादी सामाजिक परंपरा पर सीधा प्रहार है।
राजस्थान जैसे परंपराओं और रूढ़ियों को मानने वाले राज्य से ऐसी खबर सुखद एहसास देती है। हाल के दिनों में यह तीसरा मामला है, जब बेटी को परिवार का मुखिया माने जाने की प्रतीक पगड़ी पहनाई गई। खास बात यह भी है कि समाज के सभी वर्ग रूढ़ियां तोड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं। विगत मामला राजपूत परिवार का था, तो यह मामला अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़ा है।
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नागौर में 10 वर्षीय बेटी का पाग दस्तूर हुआ था
नागौर जिले की रियां बड़ी पंचायत समिति के सुरियास गांव में भी ऐसी ही मिसाल देखने को मिली। यहां दिवंगत कानसिंह राठौड़ की 10 वर्षीय पुत्री भाविका कंवर को 'पाग दस्तूर' कर परिवार की आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित किया गया। कानसिंह राठौड़ का 15 जुलाई को बीमारी के कारण निधन हो गया था। उनकी एकमात्र संतान भाविका कंवर है। बारहवें की रस्म के दौरान परंपरा के अनुसार किसी निकट संबंधी को गोद लेने पर चर्चा हो रही थी। उस दौरान परिवार की महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता, इसलिए पाग दस्तूर भाविका का ही होगा।
पाली से भी सामने आया था ऐसा मामला
मारवाड़ की सदियों पुरानी राजपूती परंपराओं और पुरुष-प्रधान व्यवस्था को समय के अनुरूप नया स्वरूप देते हुए पाली जिले के ऐतिहासिक खैरवागढ़ ठिकाने ने महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की थी। पूर्व जागीरदार और दो बार सरपंच रहे ठाकुर हरिश्चंद्र सिंह जोधा के निधन के बाद उनकी 12 वर्षीय पुत्री तेजस्वी कुमारी जोधा को खैरवागढ़ की राजगद्दी का उत्तराधिकारी घोषित किया गया।