जयपुर में पतंगबाजी और प्रशासन की लापरवाही के चलते पक्षियों की जान को खतरा बना हुआ है। पतंगबाजी के लिये इस्तेमाल होने वाला धारदार सिन्थेटिक मांजा पक्षियों के लिये जानलेवा बन गया है।
पक्षियों के सुबह घौंसलों से निकलने और शाम को वापस लौटने के वक्त पतंगबाजी पर रोक लगाई गई है। इसके लिये स्थानीय निकाय व जिला प्रशासनों को निर्देश दिये जा चुके हैं लेकिन उसका सख्ती से पालन नहीं करवाया जा रहा है। सिन्थेटिक मांजा बेचने वाले दुकानदारों के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इस संबंध में अजमेर के एक नागरिक मनोहर लाल अग्रवाल ने जनहित याचिका दायर की थी। दायर याचिका पर स्थानीय निकायों व जिला प्रशासनों को पक्षियों के हित में उनके निकलने और आने के समय में पतंग न उड़ाने के लिये सख्त निर्देश दिये जा चुके हैं। लेकिन अब भी सबसे ज्यादा पतंगबाजी इसी समय में हो रही है।