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Rajasthan: राजस्थान की तीन प्रदूषित नदियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा 20 सूत्रीय स्थायी समाधान

Tue, 04 Aug 2026 04:42 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Rajasthan News: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में बढ़ते प्रदूषण पर 20 सूत्रीय समाधान योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण की कीमत पर उद्योग नहीं चल सकते और स्थायी समाधान जरूरी है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूणी नदियों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार को 20 सूत्रीय समाधान योजना तैयार करने का सुझाव दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान तलाशना आवश्यक है।
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स्थायी समाधान पर कोर्ट का जोर
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पाली का पूरा औद्योगिक क्षेत्र नदी के किनारे स्थित है। दीर्घकाल में राज्य सरकार को उद्योगों को नदी किनारे से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य रोजगार खत्म करना नहीं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा करते हुए समाधान निकालना है।

मुख्य सचिव ने दिया विस्तृत योजना का भरोसा
वर्चुअल सुनवाई के दौरान राजस्थान के मुख्य सचिव ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार इस समस्या की गंभीरता को स्वीकार करती है। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर अदालत के समक्ष पेश की जाएगी और नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।
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अधिकारियों की समिति करेगी तैयारी
सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि मुख्य सचिव विभिन्न विभागों के अधिकारियों का एक समूह गठित करें, जो उच्चस्तरीय इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी के साथ मिलकर 20 सूत्रीय समाधान योजना तैयार करे। अदालत ने यह भी कहा कि राज्य की सभी नदियों के लिए स्थायी निगरानी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।

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7 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि मामले में अगला आदेश 7 अगस्त को पारित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि नवंबर 2025 में अदालत ने नदियों के प्रदूषण की निगरानी और दीर्घकालिक समाधान सुझाने के लिए एक उच्चस्तरीय इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी का गठन किया था। अदालत पहले भी टिप्पणी कर चुकी है कि जोजरी, बांडी और लूणी नदियों का प्रदूषण लगभग दो दशकों से नियामकीय विफलता और प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है।
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