10वीं कक्षा के एक छात्र ने छात्रवृत्ति और शोहरत पाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से न केवल फर्जी पद्म विभूषण पुरस्कार का प्रमाण पत्र तैयार किया बल्कि समाचार पत्रों में यह भी प्रकाशित करा दिया कि उसे शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति ने पदम विभूषण पदक से सम्मानित किया है। पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च पुरस्कार का फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने के आरोप में पुलिस ने छात्र समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
अदालत के आदेश पर छात्र को बाल संप्रेषण गृह भेज दिया गया है, जबकि नकली पद्म विभूषण तैयार करने के आरोप में गोदा टाईपिंग सेंटर के संचालक सिद्धार्थ गोधा और सहयोगी विशाल सिंह को अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें दो दिन के पीसी रिमांड पर भेज दिया गया।
भरतपुर में बासन गेट निवासी एक किशोर ने फर्जी तरीके से पद्म विभूषण तैयार करा लिया। इस पर पुलिस को संदेह हुआ। इसकी जांच एसओजी टीम ने की। व्यापक छानबीन के बाद पुलिस इंस्पेक्टर कैलाश चौधरी ने थाना कोतवाली में मामला दर्ज कराया। इससे पूर्व जांच के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
एसओजी की टीम ने फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र तैयार करने के लिए प्रयोग में लाए गए कंप्यूटर, मॉनीटर और किशोर के दिल्ली जाने का रेल टिकट तथा केंद्रीय गृह सचिव का कथित अर्द्ध शासकीय पत्र भी बरामद किया है।
थाना कोतवाली पुलिस ने पाया कि किशोर ने दो लोगों की मदद से नकली पद्म विभूषण का सर्टिफिकेट तैयार कराया और आगरा से प्रतीक चिह्न खरीद कर लाया। वर्ष 2010 में किसी को मिले पद्म विभूषण पुरस्कार की प्रति भरतपुर के एक कंप्यूटर सेंटर में डाउन लोड कराकर इसका फर्जी पद्म विभूषण प्रमाण पत्र तैयार करा लिया। कोतवाली पुलिस ने बुधवार रात तीनों को गिरफ्तार कर लिया।