राजस्थान में जिस बहुप्रतीक्षित रिफायनरी की नींव यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने डाली थी, वह सरकार बदलने के बाद अब जांच के दायरे में आ सकती है।
राजस्थान की पिछली कांग्रेस सरकार ने रिफ रिफाइनरी का स्थान अंतिम छह माह में लीलाला से बदल कर पचपदरा किया था, जबकि लीलाला तय जगह थी।
भाजपा सरकार बनते ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पिछली सरकार के छह महीने के कामों की जांच की सूची में रिफायनरी भी शामिल की गई है। राज्य सरकार इस मामले की जांच करवा सकती है।
पिछली सरकार के अंतिम छह माह के दौरान हुए निर्णयों की जांच के लिए गठित केबिनेट सब कमेटी के अध्यक्ष ग्रामीण विकास एवं पंचायत राजमंत्री गुलाबचंद कटारिया का कहना है कि रिफ रिफाइनरी प्रोजेक्ट में छह माह में बदलाव किए गए।
ऐसे में हर हाल में इसकी समीक्षा होगी। सूत्रों ने बताया कि नई सरकार एचपीसीएल के अधिकारियों से रिफायनरी की चर्चा करने के लिए शीर्घ बुलाएगी।
गौरतलब है कि आचार संहिता लगने से 12 दिन पहले ही रिफ ाइनरी की आधारशिला रखी गई थी। जगह बदलने पर भाजपा ने अशोक गहलोत पर अपने गृह जिले जोधपुर को लाभ पहुंचाने लगाए थे।
वाड्रा जमीन मामले की भी होगी जांच
राजस्थान के ऊर्जा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की जमीन खरीद मामले की जांच की जाएगी।
खींवसर के अनुसार वाड्रा ने जिस तरीके से राजस्थान में जमीन खरीदी हैं, वह एक घोटाला हैं। उल्लेखनीय है कि भाजपा ने वाड्रा द्वारा सोलर पावर कंपनी के लिए राजस्थान में खरीदी सैकड़ों बीघा जमीन की खरीद में घपला बताते हुए इस पर सवालिया निशान लगाया था।
हाल में भाजपा के पांच सांसदों ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पत्र लिखकर इस मामले की जांच करने की मांग भी की थी।