जिला और सेशन न्यायाधीश सिरोही द्वारा सवा चार साल पूर्व हुई पति की गैर इरादतन हत्या के मामले में आरोपी पत्नी को दोषी करार देते हुए चार साल के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। गौरतलब है कि पति-पत्नी के झगड़े के दौरान गला दबने से पति की मौत हो गई थी।
जानकारी के अनुसार यह घटना 29 दिसंबर 2020 की है। इस मामले में रेवदर मृतक इंद्र कुमार के भाई महेंद्र कुमार ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उसमें ब बताया था कि घटना के दिन सवेरे सीतादेवी ने अपने देवर जयंतीलाल को बताया था कि उसके पति के मुंह से खून निकल रहा है। जब परिवार के लोग घर पहुंचे तो इंद्र कुमार के गले पर मारपीट के निशान मिले। उसके मुंह, सिर और आंखों पर भी खून लगा हुआ था। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस की ओर से मामला दर्ज कर जांच की गई थी। जांच के बाद सीतादेवी के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय, रेवदर में आरोप पत्र पेश किया गया था। बाद में यह मामला सेशन न्यायालय, सिरोही को स्थानांतरित कर दिया गया था।
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20 गवाहों की गवाही, 40 दस्तावेज साक्ष्य किए प्रस्तुत
इस मामले में लोक अभियोजक डॉ. लक्ष्मण सिंह बाला द्वारा न्यायालय में 20 गवाहों की गवाही और 40 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे। दोनों पक्षों की बहस सुनने तथा तमाम दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय द्वारा स्वीकार किया गया कि रात में पति-पत्नी के बीच झगड़े के दौरान सीतादेवी ने इंद्र कुमार का गला घोंट दिया था। सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने सीतादेवी को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई। इसमें न्यायालय का यह भी मानना था कि दोषी महिला को अपने इस कार्य का ज्ञान था कि इससे मृत्यु हो सकती है, लेकिन हत्या करने का उसका इरादा नहीं था। उसे धारा 304 पार्ट 2 के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी मानकर चार साल के कारावास और पांच हजार रुपये का जुर्माने की सजा से दंडित किया गया है।