लाइट जलाकर दिखातीं आदिवासी महिला थावरी देवी।
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महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल पेश करते हुए सिरोही जिले के निचलागढ़ ग्राम पंचायत की वेराफली गांव की रहने वाली आदिवासी महिला थावरी देवी ने अपने क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। जिस काम को सरकारें सालों तक नहीं कर पाईं, उसे इस जुझारू महिला ने अपने संकल्प और मेहनत से कर दिखाया। थावरी देवी ने अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के माध्यम से रोशनी पहुंचाने का बीड़ा उठाया। पहले जहां पूरे गांव में अंधेरा पसरा रहता था। वहीं अब 150 से अधिक घरों में सोलर सिस्टम लगाकर उजाला कर दिया है।
बिजली के अभाव में कठिनाइयों का सामना
निचलागढ़ और आसपास के आदिवासी इलाकों में लंबे समय से बिजली की समस्या बनी हुई थी। बिजली के अभाव में वहां के लोग अंधेरे में रहने को मजबूर थे, जिससे बच्चों की पढ़ाई, गर्मी में राहत और जंगली जानवरों से सुरक्षा जैसी कई समस्याएं बनी हुई थीं। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए थावरी देवी ने एक स्वयंसेवी संस्था से छह महीने का सोलर सिस्टम प्रशिक्षण लिया और अपने गांव में सोलर पैनल लगाने की शुरुआत की। आज उनकी मेहनत से न केवल घरों में रोशनी आई है, बल्कि यदि किसी उपकरण में कोई समस्या आती है, तो उसकी मरम्मत का कार्य भी वह खुद ही करती हैं।
राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
थावरी देवी की इस प्रेरणादायक पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें एक विशेष कार्यक्रम में सम्मानित किया, जहां राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और राज्यपाल भी उपस्थित थे।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
थावरी देवी ने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी काम असंभव नहीं। उन्होंने सिर्फ अपने गांव में रोशनी ही नहीं पहुंचाई, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं को यह संदेश दिया कि आत्मनिर्भरता और संकल्प से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। आज वह आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं के लिए सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं, जिन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची इच्छाशक्ति से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।