सिरोही जिले में छह साल पुराने एक हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। आबूरोड सदर थाना क्षेत्र के बगेरी गांव में हुई इस वारदात में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अदालत ने दस-दस साल के कठोर कारावास और दस-दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा सुनाया गया।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए 61 सबूत, हथियार भी किए गए जब्त
अपर लोक अभियोजक संख्या 02 दिनेश खंडेलवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में न्यायालय के समक्ष 17 मौखिक और 44 दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही वारदात में प्रयुक्त लाठी और कुल्हाड़ी समेत सात आर्टिकल अदालत में पेश किए गए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश कुलदीप सूत्रकार ने पप्पूराम, सोमाराम और गोवाराम को दोषी करार देते हुए उन्हें दस वर्ष के कारावास और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा दी।
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आपसी रंजिश में हुआ हमला, वृद्ध की हत्या
इस हत्याकांड की शुरुआत आपसी रंजिश के चलते हुई थी। शिकायतकर्ता रमेश पुत्र भूरा गरासिया ने थाने में दर्ज करवाई रिपोर्ट में बताया था कि गांव के मोती पुत्र राजा, पप्पू पुत्र मोती, सोमा पुत्र मोती और गोवा पुत्र मोती उसके खेत में जबरन ट्रैक्टर चलाकर खेड़ाई कर रहे थे। रमेश की पत्नी ने जब इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने लाल मिर्च पाउडर उसकी आंखों और शरीर में डाल दिया और उसके साथ लाठी-कुल्हाड़ी से मारपीट की। बीच-बचाव में रमेश की मां और भाभी ने पत्नी को किसी तरह बचाया।
घात लगाकर की गई हत्या, बीचबचाव भी नहीं बचा पाया जान
घटना के बाद रमेश अपनी पत्नी को लेकर गिरवर चौकी गया। वहीं उसका भतीजा राजू, रमेश के पिता भूरा गरासिया को लेकर मोटरसाइकिल से वापस लौटा। रास्ते में भाई शंकर भी साथ हो लिया। लेकिन घर लौटते समय पहले से घात लगाए बैठे आरोपी सामने आ गए और उन्होंने लाठी और कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। शंकर ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन आरोपी इतने आक्रामक थे कि उन्होंने भूरा गरासिया को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इलाज से पहले ही भूरा की मौत हो गई।
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कई वर्षों की सुनवाई के बाद आया फैसला
यह मामला कई वर्षों तक अदालत में विचाराधीन रहा। सबूतों, गवाहों और अभियोजन की मेहनत के बाद अब न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी करार दिया। इस फैसले से पीड़ित पक्ष ने राहत की सांस ली है।